
प्रमोशन पाकर IPS बने एक साहब इन दिनों सरकारी बंगले को लेकर परेशान बताए जा रहे हैं। फिलहाल एक बड़े शहर के ग्रामीण इलाके में SP की जिम्मेदारी संभाल रहे साहब को अब अपना सरकारी आवास बचाने के लिए इधर-उधर गुहार लगानी पड़ रही है। दिलचस्प बात यह है कि कभी दूसरों के बंगले खाली कराने के लिए नोटिस थमाने वाले साहब अब खुद इसी कार्रवाई की जद में आ गए हैं। दरअसल, बड़े शहर में एक ऐसे संस्थान में पदस्थापना के दौरान साहब ने संस्थान परिसर के बंगलों में रह रहे साथी भर्ती और प्रमोटी IPS अफसरों को खूब परेशान किया था।
किसी को बंगला खाली करने का नोटिस मिला, तो किसी पर हजारों रुपये की रिकवरी निकाल दी गई। उस समय साहब नियम-कायदों को लेकर काफी सख्त बताए जाते थे। लेकिन वक्त ने ऐसी पलटी मारी कि साहब खुद SP बनकर दूसरी जगह पहुंच गए, फिर भी सरकारी बंगला खाली नहीं किया। अब जब बंगला खाली कराने और रिकवरी के नोटिस मिलने लगे हैं, तो साहब को अपनी ही पुरानी कार्रवाई याद आ रही होगी। दूसरों को नियम-कायदों का पाठ पढ़ाने वाले साहब अब खुद उसी प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
फिलहाल साहब अपने लिए राहत का रास्ता तलाश रहे हैं। देखने वाली बात यह है कि दूसरों के लिए नियम-कायदे सख्ती से लागू करने वाले साहब को अब कितनी राहत मिलती है। खबर का व्यंग्य भी इसी विरोधाभास पर आधारित है कि जो साहब कभी दूसरों के बंगले खाली कराने के लिए नोटिस देते थे, अब खुद अपना बंगला बचाने में जुटे हैं। दूसरों के लिए नियम सख्त थे, साहब लेकिन अब वही नियम अपने दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं।
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