
बड़ी मुश्किल से एक प्रमोटी IAS को बड़े संभाग की कमान मिली है, लेकिन संभागीय कार्यालय से उठती वसूली की शिकायतों ने साहब की मुश्किल बढ़ाने के आसार पैदा कर दिए हैं। संभाग में राजस्व के मामले पहले से ही बड़ी संख्या में लंबित हैं और अब फैसलों को लेकर कथित डीलिंग की कहानी भी चर्चा में आने लगी है। बताया जाता है कि कमिश्नर कार्यालय में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर स्तर के एक अफसर की नजर उन मामलों पर रहती है, जिनमें कमिश्नर साहब को निर्णय लेना होता है। मामला समझते ही संबंधित पक्ष से संपर्क साधा जाता है और कथित तौर पर डीलिंग का रास्ता तलाशा जाता है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं बताया जा रहा। आरोप हैं कि अब कुछ पटवारियों की भी अपने मामलों में रास्ता निकालने के लिए सीधे इस अफसर तक पहुंच होने लगी है। इस तरह कमिश्नर कार्यालय में लंबित मामलों और फैसलों को लेकर कथित तौर पर लेनदेन की चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। फिर भी संभागीय कार्यालय से जुड़ी ऐसी शिकायतें प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व मामलों के निपटारे को लेकर सवाल खड़े करती हैं।
अगर कमिश्नर कार्यालय में उनके नाम पर कोई खेल चल रहा है, तो इसकी जवाबदेही तय करना जरूरी है। साहब के लिए भी यह खतरे की घंटी है, क्योंकि प्रशासनिक गलियारों में ऐसी कहानी ज्यादा दिन तक दबती नहीं है। साहब को समय रहते इस कथित खेल पर लगाम लगानी होगी, वरना बड़े संभाग की कुर्सी संभालने का मौका कहीं फिर मंत्रालय वापसी की पटकथा न बन जाए।
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