
अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े नेटवर्क की नई कड़ियां सामने आ रही हैं। मुंबई पुलिस ने फायरिंग में शामिल तीन आरोपियों को राजस्थान के कोटा से पकड़ने के बाद मुंबई लाकर पूछताछ शुरू की है। वहीं, हथियार सप्लाई करने के आरोप में दिल्ली और हरियाणा से भी गिरफ्तारियां हुई हैं।
फायरिंग के बाद तीन आरोपी कोटा से गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की गई थी। घटना के दौरान टाइगर सुरक्षित रहे, जबकि मामले की जांच में पुलिस ने हमलावरों की पहचान और उनके भागने के रास्ते का पता लगाने की कोशिश शुरू की।
जांच के दौरान तीन संदिग्धों को राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से पकड़ा गया। इनमें रिहान, फूल सिंह और ऋतिक कुमार बताए गए हैं। मुंबई लाए जाने के बाद तीनों को अदालत में पेश किया गया और पुलिस ने पूछताछ के लिए उनकी हिरासत मांगी।
हथियार कहां से आया? जांच में सामने आया ‘डेड लेटर बॉक्स’
जांच की एक अहम कड़ी हथियार की सप्लाई से जुड़ी है। पुलिस के अनुसार, हथियार को पहले अमृतसर में एक तय स्थान पर छोड़ा गया था। इस तरह की व्यवस्था को जांच एजेंसियां “डेड लेटर बॉक्स” कहती हैं, जहां सामान रखने वाला और उसे लेने वाला सीधे एक-दूसरे से संपर्क में नहीं आते।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हथियार सप्लाई करने के आरोप में कुणाल, सुमित, राधा और बबीता को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि हथियार और कारतूस अमृतसर से दिल्ली और फिर मुंबई तक पहुंचाए गए।
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कथित मास्टरमाइंड अनिल पंडित का नाम सामने आया
मामले में अनिल पंडित का नाम भी सामने आया है। पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पंडित पर आरोप है कि उसने शूटर्स से संपर्क किया और हमले के लिए पैसे तथा विदेश भेजने का लालच दिया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, पंडित कथित तौर पर अमेरिका से आरोपियों के संपर्क में था और एक ऐप के जरिए निर्देश देने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दावों की जांच अभी जारी है और किसी आरोपी की भूमिका अदालत में साबित होना बाकी है।
लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से कनेक्शन की जांच
फायरिंग के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट सामने आई थी, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के नाम से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। हालांकि शुरुआती चरण में मुंबई पुलिस ने इस दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की थी।
अब हथियार सप्लाई, आरोपियों के संपर्क और कथित नेटवर्क की जांच के साथ पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फायरिंग के पीछे वास्तव में किसका आदेश था। अदालत में पुलिस ने यह भी बताया कि इस्तेमाल किए गए हथियार अभी बरामद नहीं हुए हैं और आरोपियों के मोबाइल फोन नष्ट किए जाने की बात सामने आई है।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में जांच अब केवल शूटर्स की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है। हथियारों की सप्लाई, कथित वित्तीय लेनदेन, विदेश से संपर्क और लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से संभावित कनेक्शन की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। हालांकि, जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्य सामने आने तक किसी व्यक्ति या गिरोह को इस हमले का अंतिम मास्टरमाइंड कहना जल्दबाजी होगी।
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