
टीकमगढ़/ धर्मेंद्र सिंह लोधी: जतारा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम भाटगोरा की बीट बारछी के कक्ष क्रमांक 338-ए एवं 338-बी की वन भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। अतिक्रमण, वायरल वीडियो, विधानसभा प्रश्न और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर स्थानीय लोग वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर खरगापुर विधायक ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।
हेल्पलाइन के माध्यम से भी शिकायत दर्ज
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में वन विभाग ने क्षेत्र में व्यापक अभियान चलाकर करीब 90 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया था। इसके बाद इस भूमि पर पौधारोपण की योजना भी बनाई गई थी। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय के साथ उसी भूमि पर दोबारा अतिक्रमण होने लगा और शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों ने प्रशासन को कई आवेदन दिए और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई।
इसी बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें शिकायतकर्ता ने वन विभाग के कुछ अधिकारियों और खरगापुर विधायक के बीच कथित मिलीभगत के आरोप लगाए। वीडियो सामने आने के बाद मामला जिले से लेकर भोपाल तक चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की अब तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विधायक ने आरोपों को किया खारिज
खरगापुर विधायक ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि संबंधित वन भूमि पर उनका न तो कोई स्वामित्व है और न ही किसी प्रकार का कब्जा। उन्होंने कहा कि यदि वे किसी अनियमितता के पक्षधर होते, तो स्वयं मुख्यमंत्री को शिकायत भेजने का कोई औचित्य नहीं था। विधायक का कहना है कि उन्होंने हमेशा नियमों के अनुरूप कार्रवाई और वन भूमि के संरक्षण का समर्थन किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित क्षेत्र में शासन की प्रक्रिया के तहत पात्र आदिवासी एवं अनुसूचित जाति जनजाति हितग्राहियों से जुड़े विषय भी सामने आए थे, जिसके कारण प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की स्थिति बनी। उनके अनुसार, उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं और केवल राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से प्रचारित किए जा रहे हैं।
वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका था, तो दोबारा अतिक्रमण कैसे हो गया। उनका आरोप है कि समय रहते प्रभावी निगरानी और संरक्षण नहीं होने से यह स्थिति बनी। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा वन भूमि को स्थायी रूप से सुरक्षित करने की मांग की है।
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फिलहाल भाटगोरा वन भूमि विवाद प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है। मामले में वायरल वीडियो, अतिक्रमण और लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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