
सागर।मनीष कुमार चौबे| परम पूज्य रावतपुरा सरकार महाराजश्री के सान्निध्य में सागर में आयोजित माँ राजराजेश्वरी हरिद्रा कोटि कुमकुमार्चन महाअनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ। आयोजकों के अनुसार, इस धार्मिक आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार, महाआरती और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं ने लोकमंगल, राष्ट्र की समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की।
एक माह तक चली तैयारियां, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
आयोजकों के अनुसार, महाअनुष्ठान की तैयारियां करीब एक माह पहले से शुरू कर दी गई थीं। लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में यज्ञशाला, मंडप, श्रद्धालुओं के ठहरने, पेयजल, चिकित्सा, पार्किंग और सुरक्षा की व्यवस्थाएं की गईं। आयोजन में मध्य प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा समेत कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। आयोजकों ने करीब 50 हजार श्रद्धालुओं की उपस्थिति का दावा किया।
1100 वैदिक आचार्यों ने किया मंत्रोच्चार
आयोजन के दौरान 1100 वैदिक आचार्यों ने वैदिक मंत्रों का सामूहिक उच्चारण किया। शंखनाद, घंटानाद और धार्मिक उद्घोषों के बीच श्रद्धालुओं ने माँ राजराजेश्वरी की पूजा-अर्चना की। महाअनुष्ठान में हरिद्रा (हल्दी) और कुमकुम अर्पित कर विश्व शांति, समाज की समृद्धि और लोककल्याण की प्रार्थना की गई।
देश के विभिन्न राज्यों से मंगाई गई पूजन सामग्री
आयोजकों के मुताबिक, महाअनुष्ठान के लिए देवास से हल्दी, नेपाल से रुद्राक्ष, दिल्ली से पुष्प, सूरत से श्रृंगार सामग्री, उड़ीसा से नारियल, वाराणसी से पूजन सामग्री, हरिद्वार और बरमान से पवित्र जल सहित विभिन्न राज्यों से विशेष पूजन सामग्री मंगाई गई। आयोजन में एक लाख दीप प्रज्वलित कर भव्य महाआरती भी की गई।
रावतपुरा सरकार ने दिया सेवा और संस्कार का संदेश
महाअनुष्ठान के दौरान रावतपुरा सरकार महाराजश्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि माँ राजराजेश्वरी की उपासना केवल व्यक्तिगत समृद्धि तक सीमित नहीं, बल्कि विश्व कल्याण, धर्म की प्रतिष्ठा और मानवता की उन्नति का संकल्प है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सेवा, संस्कार, सदाचार और सनातन मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
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