
टीकमगढ़/ दित्यपाल राजपूत: मध्यप्रदेश का टीकमगढ़ जिला ग्रामीण स्वच्छता और ग्रे वॉटर प्रबंधन के क्षेत्र में एक अभिनव मॉडल के रूप में उभर रहा है। जिले की ग्राम पंचायतों में चैंबर आधारित अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिससे गांवों में गंदे पानी के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण तैयार हो रहा है। ग्राम पंचायत ऊमरी सहित जिले की कई पंचायतों में इस पहल के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
चैंबर और पाइपलाइन से हो रहा ग्रे वॉटर का प्रबंधन
इस नवाचार के तहत घरों के बाहर सिल्ट चैंबर बनाए जा रहे हैं, जिन्हें 8 इंच की पाइपलाइन से आपस में जोड़ा जाता है। अंतिम बिंदु पर लीच पिट तैयार कर घरेलू उपयोग के बाद निकलने वाले ग्रे वॉटर का सुरक्षित निष्पादन किया जाता है। इससे गंदा पानी खुले में फैलने से रुक रहा है और गांवों में स्वच्छता बेहतर हो रही है।
गांवों में दिख रहे सकारात्मक बदलाव
इस मॉडल के लागू होने से गांवों में कीचड़ और जलभराव की समस्या कम हो रही है। मच्छरों के प्रजनन पर नियंत्रण मिलने से मच्छरजनित बीमारियों की आशंका भी घट रही है। साथ ही स्वच्छता और स्वास्थ्य के स्तर में सुधार होने से ग्रामीणों को बेहतर जीवन परिवेश मिल रहा है।
212 ग्राम पंचायतों में विकसित हो रहा मॉडल
जिले की 212 ग्राम पंचायतों में चैंबर आधारित अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जा रहा है। यह कार्य 15वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग तथा पंचायत स्तरीय टाइड फंड की राशि से कराया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक व्यापक अभियान है।
इस पहल का असर ग्रामीणों की सोच में भी दिखाई दे रहा है। कई गांवों में लोग अब गर्व से कह रहे हैं कि “हमारे गांव की गलियां अब आंगन में बदल गई हैं।”
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