
उमरिया/ राकेश दर्दवंशी: उमरिया नगर पालिका के 107 वर्ष पूरे होने पर शहर में गौरव दिवस मनाया जा रहा था। कार्यक्रमों के बीच शहर की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों की बदहाल तस्वीर ने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। नगर के कई वार्डों में गरीब परिवार आज भी सड़क, जल निकासी, पक्के मकान और जमीन के पट्टे जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार कर रहे हैं। बारिश ने इनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
कीचड़ और गंदगी के बीच जिंदगी गुजार रहे परिवार
उमरिया की विभिन्न झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवारों की स्थिति बारिश के मौसम में और ज्यादा खराब हो गई है। कई जगह सड़कों पर कीचड़ और गंदगी जमा है। जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से बारिश का पानी झोपड़ियों के आसपास जमा हो रहा है।
बस्तियों में रहने वाले बच्चों को भी इन्हीं परेशानियों के बीच खेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
स्वीकृति पत्र मिला, खाते में नहीं पहुंची आवास की राशि
बस्ती में रहने वाली महिलाओं ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें स्वीकृति पत्र तो मिल चुका है, लेकिन करीब दो महीने बीतने के बाद भी उनके बैंक खातों में आवास निर्माण की राशि नहीं पहुंची है।
हितग्राहियों का कहना है कि पक्का मकान मिलने की उम्मीद में उन्होंने स्वीकृति पत्र मिलने के बाद राहत महसूस की थी, लेकिन राशि नहीं मिलने से अब भी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं।
सर्वे पूरा, फिर भी नहीं मिला जमीन का पट्टा
झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले पात्र परिवारों को जमीन का पट्टा देने की घोषणा के बाद सर्वे की प्रक्रिया भी पूरी की गई थी। इसके बावजूद स्थानीय लोगों के अनुसार अब तक पात्र परिवारों को पट्टे वितरित नहीं किए गए हैं।
यही पट्टा अब प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि के रास्ते में भी बड़ी बाधा बताया जा रहा है।
सीएमओ ने बताई राशि रुकने की वजह
इस मामले में नगर पालिका उमरिया के सीएमओ किशन सिंह का कहना है कि हितग्राहियों को जमीन का पट्टा मिलने के बाद ही प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि उनके खातों में पहुंच पाएगी।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब पट्टा वितरण के लिए सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, तो पात्र परिवारों को अब तक जमीन के पट्टे क्यों नहीं दिए गए?
गौरव दिवस के जश्न के बीच उठे विकास पर सवाल
एक तरफ उमरिया नगर पालिका के 107 वर्ष पूरे होने पर गौरव दिवस मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी शहर की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले परिवार पक्के आशियाने और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
गौरव दिवस के बीच सामने आई बस्तियों की यह तस्वीर नगर पालिका की कार्यप्रणाली और विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन परिवारों की समस्याओं के समाधान और पट्टा वितरण को लेकर कब तक ठोस कदम उठाता है।
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