
उमरिया।राकेश दर्दवंशी| जिले के दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के सक्रिय होने के आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना मान्यता, डिग्री या पंजीकरण के कई लोग खुलेआम मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की जान जोखिम में पड़ रही है।
गलत इलाज और प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि कथित झोलाछाप डॉक्टर गंभीर बीमारियों का गलत उपचार कर रहे हैं। बिना आवश्यक जांच के इंजेक्शन लगाए जाते हैं और दवाएं दी जाती हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में मरीजों की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाता है, जिससे समय पर उपचार नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों ने कार्रवाई की उठाई मांग
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब और आदिवासी परिवारों से इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ऐसे लोगों के हौसले बढ़े हैं।
स्वास्थ्य विभाग से विशेष अभियान चलाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे जिले में विशेष अभियान चलाकर कथित अवैध क्लीनिकों की जांच करने, दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और आदिवासी क्षेत्रों में योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
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