शाहपुर छात्रावास में बदहाली का खुलासा, टपकती छत देख भड़कीं कलेक्टर, जिम्मेदारों को फटकार

उमरिया/ राकेश दर्दवंशी: जिले के पाली जनपद अंतर्गत ग्राम शाहपुर स्थित छात्रावास में व्याप्त अव्यवस्थाओं की पोल उस समय खुल गई, जब उमरिया कलेक्टर ने अचानक छात्रावास का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छात्रावास की बदहाल व्यवस्थाएं देखकर कलेक्टर नाराज हो उठीं और जिम्मेदार अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। गंदे बिस्तर, भोजन व्यवस्था में खामियां और साफ-सफाई की खराब स्थिति के साथ भवन की छत से बारिश का पानी टपकने की बात भी सामने आई।

गंदे बिस्तर और भोजन व्यवस्था पर नाराजगी

छात्रावास के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को कई स्तर पर अव्यवस्थाएं मिलीं। छात्रों के बिस्तरों की स्थिति साफ-सफाई के लिहाज से संतोषजनक नहीं बताई गई। वहीं भोजन व्यवस्था को लेकर भी खामियां सामने आईं।

छात्रावास में रहने वाले बच्चों को बेहतर और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान मिली अव्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर ने अधिकारियों से नाराजगी जताई और तत्काल व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।

टपक रही छात्रावास की छत, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

निरीक्षण में सबसे गंभीर स्थिति छात्रावास भवन की छत को लेकर सामने आई। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या बताई गई है। इसी भवन में छात्र रह रहे हैं, ऐसे में भवन की स्थिति को लेकर बच्चों की सुरक्षा पर चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहा है कि यदि भवन में लंबे समय से ऐसी समस्या थी तो समय रहते इसकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई। बारिश के मौसम में लगातार पानी टपकने से भवन और कमरों की स्थिति और खराब होने की आशंका बनी रहती है।

जिम्मेदार अधिकारियों को कलेक्टर ने लगाई फटकार

छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर ने सहायक आयुक्त पूजा दुबेदी और संलग्न अधिकारी संजय पाण्डेय को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने अधिकारियों को छात्रावास की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर के निरीक्षण के बाद अब विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने और छात्रावास में मूलभूत सुविधाएं बेहतर किए जाने की उम्मीद है।

आदिवासी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

शाहपुर छात्रावास की स्थिति को लेकर आदिवासी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि छात्रावास में बच्चों को लंबे समय से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन विभागीय स्तर पर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

यदि भवन की छत बारिश में टपक रही थी और साफ-सफाई तथा भोजन व्यवस्था में भी खामियां थीं, तो नियमित निरीक्षण के दौरान इन समस्याओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया—यह सवाल अब चर्चा में है।

अचानक निरीक्षण से खुली व्यवस्थाओं की पोल

कलेक्टर के अचानक निरीक्षण ने छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर विभागीय अधिकारियों की ओर से छात्रावासों का निरीक्षण किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद यदि इतनी अव्यवस्थाएं सामने आती हैं तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद यह देखना अहम होगा कि छात्रावास की स्थिति वास्तव में कितनी जल्दी सुधरती है।

बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा

छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सबसे महत्वपूर्ण है। जर्जर या क्षतिग्रस्त भवन, गंदगी और भोजन व्यवस्था में खामियां सीधे तौर पर छात्रों के हितों से जुड़ी हैं।

ऐसे में केवल अधिकारियों को फटकार लगाने के बजाय समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है। भवन की मरम्मत, साफ-सफाई, गुणवत्तापूर्ण भोजन और नियमित निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।

अब निर्देशों के अमल पर रहेगी नजर

कलेक्टर के निरीक्षण के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिए गए निर्देशों पर अमल कब तक होता है। क्या टपकती छत की समस्या का स्थायी समाधान होगा? क्या बच्चों को स्वच्छ बिस्तर और बेहतर भोजन मिलेगा? क्या छात्रावास की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे। फिलहाल कलेक्टर की सख्ती के बाद छात्रावास की व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद जरूर जगी है।

 
 
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Manisha Gupta

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