
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3 लोगों को हिरासत में लिया है, इसकी जानकारी कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने फेसबुक के माध्यम से दी है, उन्होने बताया की पिछले 27 घंटे से भोपाल साइबर पुलिस ने कार्यकर्ताओं को बिना किसी कारण के हिरासत में रखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री और डीजीपी को टैग करते हुए कहा कि एमपी पुलिस की इस कार्रवाई से उन्हें आश्चर्य और निराशा हुई है। मामला पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से किए गए एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला
कांग्रेस IT सेल से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया था, जिसमें वसुंधरा राजे के नाम से एक कथित पत्र वायरल किया गया। इस पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई शुरू की। जानकारी के अनुसार, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से सामने आए एक कथित वायरल पत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर कई अहम सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि जहां एक तरफ महिला आरक्षण लागू करने की बात की जा रही है, वहीं इसे परिसीमन से जोड़ना संदेह की स्थिति पैदा करता है। पत्र में यह भी सवाल किया गया है कि यदि सरकार की मंशा स्पष्ट है, तो आरक्षण को सीधे और पारदर्शी तरीके से लागू क्यों नहीं किया जा रहा। इसमें ऐसे फैसलों को लोकतांत्रिक संतुलन और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के लिए चिंताजनक बताया गया है। कथित पत्र में भारतीय जनता पार्टी की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधते हुए कहा गया है कि पार्टी की पहचान अब अपने मूल मूल्यों से हटकर सत्ता-केंद्रित सोच की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। वहीं, महिला सम्मान के मुद्दे पर संसद में दिए जाने वाले बयानों को महज औपचारिकता करार देते हुए इसे नैतिक रूप से भी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया गया है।
पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही जानकारी की सत्यता की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि पोस्ट के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पोस्ट किस स्तर पर तैयार और प्रसारित किया गया।
बीजेपी ने उठाए सवाल
इस मामले को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस कार्रवाई को जरूरी बताते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फेक कंटेंट के खिलाफ सख्ती जरूरी है।
कांग्रेस का पलटवार
वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया का कहना है कि इससे महिला आरक्षन के नाम पर होने वाले षड़यंत्र का उजागर हुआ है। उन्होने इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव करार दिया है। पार्टी का कहना है कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है और आईटी सेल को निशाना बनाया जा रहा है।
वसुंधरा राजे का कहना है, यह पत्र शुभचिंतकों की कारगुजारी है
वसुंधरा राजे ने ट्वीट पोस्ट करते हुए लिखा कि सांच को आंच की जरुरत नहीं होती है। मान लीजिए कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वाले ऐसे लोग चौथी बार भी विपक्ष में ही बैठने की तैयारी कर चुके हैं। ऐसे लोग चाहे जितना भी भ्रम फैलाएं, बाधाएं उत्पन्न करें, देश की नारी शक्ति न रुकी है, न रुकेगी। वायरल पत्र शुभचिंतकों की कारगुजारी मात्र है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी देने के प्रयास का मैं ही नहीं, देश की हर महिला स्वागत कर रही हैं।
इस घटना के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक तरफ सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और उसकी जिम्मेदारी को लेकर बहस छिड़ी हुई है, वहीं दूसरी तरफ इसे राजनीतिक टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है।
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