महिला दिवस विशेष: ग्वालियर-चंबल में नारी नहीं अबला, लाइसेंस धारकों में 600 महिलाएं

आज महिला दिवस है आज का दिन महिलाओं के नाम और उनके आत्मविश्वास और समर्पण के नाम. आपको कुए ऐसी महिलाओं के बारे में बताएंगे जो मिसाल बन रही हैं. ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में एक नई तस्वीर सामने आ रही है। यहां की महिलाएं केवल पारंपरिक सोलह श्रृंगार तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार भी ले रही हैं। कभी डकैतों के खौफ से शुरू हुई यह परंपरा अब महिला सशक्तिकरण की पहचान बनती जा रही है।

कभी डकैतों के गढ़ रहे ग्वालियर-चंबल के बीहड़ों में अब महिलाएं रिवॉल्वर और पिस्टल के लाइसेंस हासिल कर रही हैं। ग्वालियर-चंबल संभाग में देश में सबसे अधिक लाइसेंसी हथियार जारी होने की बात कही जाती है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक भिंड, मुरैना और ग्वालियर जिलों में महिलाएं आत्मरक्षा के लिए हथियार लेकर एक नई मिसाल पेश कर रही हैं।

आत्मरक्षा के लिए हथियार

ग्वालियर शहर के धर्मवीर पेट्रोल पंप के पास रहने वाली विद्या देवी कौरव के पास भी अपना लाइसेंसी हथियार है। उन्होंने बताया कि हथियार आत्मरक्षा के लिए लिए जाते हैं। उनकी शादी के समय पूरा क्षेत्र दस्यु प्रभावित था। विद्या देवी ने आगे बताया कि सन 1970 में डकैतों ने उनके पति को दो बार पकड़ा था। इस घटना के बाद वे सब कुछ छोड़कर ग्वालियर आकर बस गए थे।

उनकी जिज्ञासा थी कि जब पुरुष घर पर न हों, तो आत्मरक्षा के लिए हथियार होना आवश्यक है। उनका मानना है कि अभी तक यही देखा जाता था कि केवल पुरुष ही हथियार चला सकते हैं, लेकिन इसकी बड़ी वजह यह है कि जब महिलाओं के पास हथियार होगा ही नहीं तो वे चलाएंगी कैसे।

इसी सोच को ध्यान में रखकर उन्होंने अपना लाइसेंसी हथियार खरीदा। विद्या देवी कौरव ने कहा कि ग्वालियर की धरती पवित्र है, क्योंकि यहां वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई ने शहादत दी थी। ऐसे में हर महिला को प्रेरणा लेनी चाहिए कि उन्हें आत्मरक्षा के लिए लाइसेंसी हथियार अवश्य रखना चाहिए।

देश की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे

देश और मध्य प्रदेश के आंकड़ों को देखेंगे तो सबसे ज्यादा लाइसेंसी हथियार ग्वालियर चंबल संभाग में हैं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी है। विद्या देवी कौरव कहती हैं कि महिलाएं आज गाड़ी से लेकर जहाज और हवाई जहाज तक चला रही हैं। ऐसे में आज के दौर में हालात को देखते हुए सरकार से निवेदन करेंगे कि महिलाओं को लाइसेंसी हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। ताकि जरूरत पड़ने पर वह अपनी आत्मरक्षा और परिवार की रक्षा कर सकें।

कंधे पर बंदूक टांगकर शान से निकलती हैं महिलाएं

ग्वालियर के गोले के मंदिर इलाके में रहने वाली गुड्डी बैस के पास 20 साल से ज्यादा लंबे समय से खुद का लाइसेंसी हथियार है। उनका मानना है कि लोग हथियार को शौक के लिए रखते हैं, लेकिन हथियार शौक के लिए नहीं बल्कि आत्मरक्षा के लिए रखना चाहिए। एक समय ऐसा आया था जब मेरे पति पर जानलेवा हमला हुआ था उस वक्त महसूस हुआ कि आत्मरक्षा के लिए हथियार परिस्थितियों को देखते हुए जरूर होना चाहिए।

लाइसेंसी हथियार धारकों में 600 महिलाएं

एसडीएम सीबी प्रसाद का कहना है कि प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक ग्वालियर जिले में 30 हजार से ज्यादा लाइसेंस हैं, जिसमें महिलाओं की संख्या 600 के करीब है,जो अब तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, दुरुपयोग रोकने के लिए सख्ती भी बरती जा रही, लेकिन आत्मरक्षा का यह ट्रेंड महिलाओं को मजबूत बना रहा है।

महिलाओं का यह साहस न सिर्फ ग्वालियर चंबल की शान है, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा भी है। क्योंकि महिलाएं अब सिर्फ घर गृहस्थी ही नहीं संभालतीं बल्कि सोलह श्रृंगार के साथ आत्मरक्षा के लिए हथियार भी रखती हैं।

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