
सुरक्षा नियमों के पालन पर उठे सवाल
मुरैना। जिले में संचालित स्मार्ट मीटर एवं स्मार्ट DTR मीटर परियोजना को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में स्मार्ट DTR मीटर कार्य के दौरान करंट लगने की घटना के बाद कर्मचारियों की सुरक्षा, परियोजना की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था चर्चा का विषय बन गई है।
स्थानीय लोगों और कुछ कर्मचारियों का कहना है कि परियोजना के दौरान समय-समय पर दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आती रही हैं। उनका सवाल है कि यदि कर्मचारियों के साथ लगातार हादसे हो रहे हैं, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
इस संबंध में जब मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, मुरैना के महाप्रबंधक से चर्चा की गई, तो उनके अनुसार मुरैना में स्मार्ट मीटर परियोजना का कार्य Alfnar एवं Esyasoft जैसी निजी कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह केंद्र सरकार की योजना है तथा परियोजना के संचालन एवं कर्मचारियों से संबंधित विषयों की जानकारी संबंधित कंपनियों से प्राप्त की जानी चाहिए।
सुरक्षा नियमों के पालन पर उठे सवाल
विद्युत सुरक्षा के सामान्य सिद्धांतों के अनुसार, 11 kV अथवा LT लाइन पर कार्य शुरू करने से पहले निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इसमें सामान्यतः—
- Permit to Work (PTW) जारी किया जाना।
- संबंधित लाइन अथवा उपकरण का Shutdown (बिजली आपूर्ति बंद) कराया जाना।
- लाइन को Isolate कर सुरक्षित घोषित किया जाना।
- कर्मचारियों को PPE (इंसुलेटेड ग्लव्स, हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, सुरक्षा जूते आदि) उपलब्ध कराना।
- केवल प्रशिक्षित एवं अधिकृत कर्मचारियों से ही कार्य कराना।
यदि किसी विशेष कार्य में अलग प्रक्रिया अपनाई गई हो, तो उसके लिए भी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होता है।
जांच के प्रमुख सवाल
घटना के बाद अब कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आ रहे हैं—
- क्या कार्य शुरू करने से पहले Permit to Work (PTW) जारी किया गया था?
- क्या संबंधित लाइन या DTR का Shutdown लिया गया था?
- क्या कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे?
- यदि कार्य विद्युत आपूर्ति चालू (Live Line) रहते हुए कराया गया, तो क्या उसके लिए निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया का पालन किया गया था?
- कार्य की निगरानी किस अधिकारी अथवा एजेंसी के जिम्मे थी?
- यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा?
उपभोक्ताओं की सहमति पर भी उठे सवाल
स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर उपभोक्ताओं के बीच भी कई सवाल उठ रहे हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उनके घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, लेकिन उनसे पहले उनकी लिखित सहमति (Consent) नहीं ली जाती।
उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर बदलने से पहले उन्हें प्रक्रिया, नियम, शिकायत निवारण व्यवस्था तथा उनके अधिकारों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही संबंधित विभाग और परियोजना संचालित करने वाली कंपनियों को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि स्मार्ट मीटर स्थापना के लिए कौन-से नियम और दिशा-निर्देश लागू हैं तथा किन परिस्थितियों में उपभोक्ता की पूर्व सहमति आवश्यक होती है।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग, परियोजना संचालित करने वाली कंपनियां और प्रशासन इन सवालों का क्या जवाब देते हैं तथा जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।








