‘राजा’ नहीं ‘विचारधारा’ हैं दिग्विजय सिंह: राज्यसभा को अलविदा कहते हुए क्यों याद आ रहे हैं उनके वो ‘सच’, जिनका कभी मजाक बना था?

नई दिल्ली/भोपाल:

भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने गलियारों में हलचल मचा दी है। सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब तीसरी बार राज्यसभा नहीं जाएंगे और चाहते हैं कि उनकी जगह किसी नए चेहरे को अवसर मिले। लेकिन यह सिर्फ एक सांसद का कार्यकाल खत्म होना नहीं है, बल्कि एक ऐसी विचारधाराका सदन से बाहर होना है जिसने हमेशा सत्ता की आंखों में आंखें डालकर सच बोला।

मजाक से हकीकत तक का सफर

दिग्विजय सिंह के बारे में कहा जाता है कि वे जो आज बोलते हैं, देश उसे सालों बाद समझ पाता है। जब उन्होंने पहली बार सदन और सार्वजनिक मंचों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निजी जीवन या उनकी वैवाहिक स्थिति पर टिप्पणी की थी, तो भाजपा के आईटी सेल ने उनका जमकर मजाक उड़ाया। मीम्स की बाढ़ आ गई थी। लेकिन समय गवाह है कि दिग्विजय सिंह की कही हर बात अंततः सत्य की कसौटी पर खरी उतरी। विपक्ष के पास उनके तथ्यों का कोई जवाब नहीं होता था, इसलिए मजाकको हथियार बनाया गया।

एक विचारधारा जिसे दबाना मुमकिन नहीं

दिग्विजय सिंह महज एक राजनेता नहीं, बल्कि स्वयं में एक चलती-फिरती लाइब्रेरी और विचारधारा हैं। राजनीति में ऐसी स्पष्टता बहुत कम पाई जाती है। जहाँ एक ओर भाजपा और संघ का मजबूत आईटी सेल उनके पीछे पड़ा रहा, वहीं दूसरी ओर उनकी दूरदर्शिता ने बार-बार यह साबित किया कि उन्हें डिगाना आसान नहीं है।

बंद कमरे की दहाड़ और चरणों में समर्पण

राजनीतिक गलियारों का एक कड़वा सच यह भी है कि जो नेता कैमरों के सामने दिग्विजय सिंह के खिलाफ आग उगलते हैं, वही बंद कमरों और ट्रेन के डिब्बों में उन्हें राजा साहबकहकर संबोधित करते हैं। ऐसे कई किस्से मशहूर हैं जहाँ विपक्ष का बड़ा नेता सदन में तो दहाड़ता है, लेकिन राजा साहब का एक फोन आते ही उनकी हिचकियाँ बंद हो जाती हैं। यह दिग्विजय सिंह के व्यक्तित्व का प्रभाव है कि वैचारिक मतभेद होने के बावजूद, विरोधी भी उनके चरणों में सम्मान से झुक जाते हैं।

क्या कांग्रेस भर पाएगी यह कमी?

दिग्विजय सिंह का राज्यसभा न जाने का फैसला कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। सदन में उनकी तार्किक बातें, बेबाक अंदाज और भाजपा की घेराबंदी करने की कला अद्वितीय है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे पद के मोह में नहीं हैं, बल्कि पार्टी की मजबूती के लिए त्याग करने को तैयार हैं।

  • Related Posts

    सत्ता की चकाचौंध में हाशिए पर ‘ईमानदारी’, धीरज पटेरिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अनदेखी पर शाह-मोदी की बीजेपी का ‘मौन’ क्यों?

    राजनीति में निष्ठा, समर्पण और संगठन के प्रति जीवन…

    आगे पढ़ें
    अंधेर नगरी, चौपट राजा: वल्लभ भवन से ‘मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान’ में करोड़ों का महाघोटाला; डॉ. अरविंद यादव और भ्रष्ट तंत्र ने इंसानियत को किया तार-तार!

    कैंसर और गंभीर मरीजों के हक के पैसे पर…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    पाकिस्तानी बहू से भारत की जासूस बनने तक की कहानी, कैसे बचा INS विक्रांत? जानिए पूरी दास्तान

    पाकिस्तानी बहू से भारत की जासूस बनने तक की कहानी, कैसे बचा INS विक्रांत? जानिए पूरी दास्तान

    ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, 5 सेना और 1 वायुसेना के जवान शामिल

    ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, 5 सेना और 1 वायुसेना के जवान शामिल

    टेलर स्विफ्ट करेंगी ट्रैविस केल्से से शादी? मैडिसन स्क्वायर गार्डन के आसपास सड़कें बंद करने की मांगी गई अनुमति

    टेलर स्विफ्ट करेंगी ट्रैविस केल्से से शादी? मैडिसन स्क्वायर गार्डन के आसपास सड़कें बंद करने की मांगी गई अनुमति

    भारत में महंगे हुए iPad और MacBook, AI बूम के चलते Apple ने बढ़ाईं ₹70,000 तक कीमतें

    भारत में महंगे हुए iPad और MacBook, AI बूम के चलते Apple ने बढ़ाईं ₹70,000 तक कीमतें

    चीन में 7 लाख डिलीवरी वर्कर्स की जगह लेंगे रोबोट, JD.com संस्थापक का बड़ा दावा

    चीन में 7 लाख डिलीवरी वर्कर्स की जगह लेंगे रोबोट, JD.com संस्थापक का बड़ा दावा