फीफा वर्ल्ड कप पर साया: ट्रम्प बोले- ईरानी टीम का अमेरिका न आना बेहतर

सार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा बयान दिया है। ट्रम्प ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए अगर ईरान की फुटबॉल टीम अमेरिका नहीं आती तो शायद वही बेहतर होगा, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि टीम आती है तो अमेरिका उनका स्वागत करेगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के एक मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों में ईरान की टीम के लिए अमेरिका में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लेना मुश्किल हो सकता है। इस मुद्दे ने खेल और राजनीति के संबंधों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

विस्तार

फुटबॉल दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल माना जाता है और फीफा वर्ल्ड कप इसका सबसे बड़ा मंच है। आने वाला विश्व कप अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की मेजबानी में आयोजित होना है। ऐसे में कई देशों की टीमें टूर्नामेंट की तैयारी में जुटी हुई हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच जारी राजनीतिक तनाव ने खेल के इस बड़े आयोजन को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एक बयान में कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह ईरान के लिए बेहतर हो सकता है कि वह अपनी टीम को अमेरिका भेजने के फैसले पर सावधानी से विचार करे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका खेल और खिलाड़ियों का सम्मान करता है और अगर ईरान की टीम आती है तो उनका स्वागत किया जाएगा, लेकिन सुरक्षा और राजनीतिक हालात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस बयान से पहले ईरान के एक मंत्री ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो ईरान की राष्ट्रीय टीम के लिए अमेरिका जाकर फीफा वर्ल्ड कप खेलना मुश्किल हो सकता है। उनका कहना था कि खिलाड़ियों की सुरक्षा, यात्रा व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को देखते हुए स्थिति जटिल बन सकती है।

अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में कई बार राजनीतिक परिस्थितियां भी असर डालती रही हैं। इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जब देशों के बीच तनाव के कारण खिलाड़ियों की यात्रा, वीजा या भागीदारी को लेकर विवाद खड़े हुए। हालांकि फीफा आमतौर पर यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाए और सभी योग्य टीमों को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिले।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करता है तो फीफा और मेजबान देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि खिलाड़ियों की सुरक्षा और यात्रा से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान किया जाए। खेल प्रशंसकों का भी मानना है कि फुटबॉल जैसे वैश्विक खेल को राजनीतिक विवादों से दूर रखना चाहिए ताकि खिलाड़ी और दर्शक दोनों इस खेल का आनंद ले सकें।

दूसरी ओर इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय खेल समुदाय में चर्चा तेज हो गई है कि क्या भविष्य में भू-राजनीतिक तनाव बड़े खेल आयोजनों को प्रभावित कर सकता है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं बल्कि कूटनीतिक और सांस्कृतिक संवाद का भी माध्यम बन चुका है।

फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और यह आने वाले महीनों में अमेरिका-ईरान संबंधों तथा अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक माहौल पर निर्भर करेगा कि ईरान की टीम वर्ल्ड कप के दौरान अमेरिका में खेलने आती है या नहीं।

  • gaurav singh rajput

    gaurav singh rajput

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