
ब्रांडवाणी डेस्क: वर्दी, अनुशासन और जिम्मेदारी… यही तीन शब्द पुलिस महकमे की पहचान माने जाते हैं। लेकिन जब इन्हीं सिद्धांतों पर सवाल उठने लगें, तो मामला चर्चा का विषय बन जाता है। एक जिले के पुलिस विभाग से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने विभागीय कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिना अनुमति विदेश यात्रा
ब्रांडवाणी की मिली जानकारी के अनुसार जिले में पदस्थ एक रिजर्व इंस्पेक्टर (आरआई) बिना किसी पूर्व अनुमति के विदेश यात्रा पर निकल गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने विभाग को बिना सूचना दिए ही बैंकॉक की यात्रा कर डाली।
मुख्यालय ने भेजा कारण बताओ नोटिस
जैसे ही इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस मुख्यालय तक पहुँची, वहाँ से तुरंत संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। इससे विभाग में हलचल मच गई।
लौटने के बाद आया दिलचस्प मोड़
कहानी में दिलचस्प मोड़ तब आया जब आरआई साहब विदेश से लौटे। उम्मीद थी कि इस मामले में सख्त विभागीय कार्रवाई होगी, लेकिन बताया जा रहा है कि जिले के पुलिस अधीक्षक ने खुद कोई कठोर कदम उठाने के बजाय आरआई का बाद में दिया गया अनुमति आवेदन मुख्यालय को अग्रसारित कर दिया।
जिम्मेदारी से बचने की कोशिश?
अब सवाल यही उठ रहा है कि जब नियमों का उल्लंघन साफ दिखाई दे रहा था, तो जिले के जिम्मेदार अधिकारी ने खुद निर्णय लेने से परहेज क्यों किया। क्या यह केवल प्रशासनिक ढिलाई है या फिर जिम्मेदारी को उच्च स्तर पर स्थानांतरित करने की कोशिश?
अनुशासन पर उठे सवाल
पुलिस विभाग में अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता माना जाता है। ऐसे में इस तरह के मामलों में स्पष्ट और सख्त कार्रवाई न होना व्यवस्था की साख पर असर डाल सकता है।
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