
ब्रांडवामी डेस्क: राजधानी के गलियारों में इन दिनों एक युवा जिला अधिकारी और सूबे के कद्दावर पूर्व मुख्यमंत्री के बीच छिड़ा ‘ईगो क्लैश’ चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह तकरार अब महज़ कलेक्ट्रेट की फाइलों या दफ्तरों तक महदूद नहीं है, बल्कि इसकी तपिश सीधे देश के पावर सेंटर यानी दिल्ली तक जा पहुँची है। हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर एक नौजवान कलेक्टर ने ऐसा क्या कर दिया कि सीधे पूर्व मुख्यमंत्री की रडार पर आ गए? दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ में जिले में बेखौफ फल-फूल रहा अवैध खनन का वो सिंडिकेट है, जिस पर पूर्व सीएम का खुला आरोप है कि साहब की शह पर सब कुछ लुट रहा है और प्रशासन ने जानबूझकर अपनी पलकें मूंद रखी हैं।
विवाद ,भ्रष्टाचार और शिकायतों का अंबार
विवाद सिर्फ भ्रष्टाचार के इल्जामों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ‘साहब’ के बर्ताव को लेकर भी शिकायतों का अंबार लगा है। चर्चा गरम है कि कलेक्टर साहब को न तो आम आदमी की फरियाद सुनने की फुर्सत है और न ही वे जन प्रतिनिधियों के फोन का जवाब देना अपनी मर्यादा के अनुकूल समझते हैं। आम जनता से इसी बढ़ते फासले ने जलती आग में घी डालने का काम किया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस पूरी मनमानी और प्रशासनिक ढिलाई का कच्चा चिट्ठा सीधे दिल्ली के आला दरबार में पेश कर दिया है, जिससे पूरी नौकरशाही में खलबली मची हुई है। यह कड़वाहट कोई नई नहीं है; इससे पहले भी ‘जनता चौपाल’ के मंच से पूर्व सीएम अपनी बेरुखी सरेआम जाहिर कर चुके हैं।
लेकिन अब बात जिस मुकाम पर आ खड़ी हुई है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में जिले की कमान में बड़ा उलटफेर मुमकिन है। जब एक मंझे हुए सियासी खिलाड़ी और एक युवा अफसर की जिद आपस में टकराती है, तो खामियाजा सीधे जनता और विकास को भुगतना पड़ता है। अब सबकी निगाहें दिल्ली पर टिकी हैं कि वहाँ से क्या फरमान जारी होता है और क्या कलेक्टर अपनी कार्यशैली में सुधार लाते हैं या फिर उनकी रवानगी की तैयारी पूरी हो चुकी है।
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