
ब्रांडवाणी डेस्क: नियमों को ठेंगा दिखाने वाले उस रक्षक की हकीकत सामने आई है, जो खुद अब कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है। यह पूरा मामला एक जनपद के पुलिस महकमे का है, जहाँ कायदों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाकर सात समंदर पार की मौज तो की गई, लेकिन जब जवाबदेही की घड़ी आई, तो बड़े सिपहसालार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिखे।
पूरी कहानी एक आरआई के बैंकॉक दौरे के इर्द-गिर्द बुनी गई है। ब्रांडवाणी को पुख्ता जानकारी मिली है कि इन महाशय ने बिना किसी विभागीय अनुमति या सूचना के विदेशी सरजमीं की सैर कर डाली। जैसे ही यह खबर पुलिस मुख्यालय की चौखट तक पहुँची, महकमे ने फौरन ‘कारण बताओ नोटिस’ थमा दिया। यहाँ तक तो सब कुछ प्रक्रिया के मुताबिक चलता दिखा, लेकिन असली खेल तब शुरू हुआ जब आरआई साहब अपनी छुट्टियां मनाकर वापस लौटे।
ताज्जुब इस बात का है कि अनुशासनहीनता के इतने बड़े और साफ मामले में, जिले के पुलिस कप्तान ने कड़ा एक्शन लेने के बजाय एक नरम रुख अख्तियार कर लिया। आरोपी अधिकारी की ओर से बाद में पेश किए गए अनुमति आवेदन को एसपी साहब ने खामोशी के साथ ऊपर की ओर सरका दिया। अब बुनियादी सवाल यह खड़ा होता है कि जब नियमों का उल्लंघन शीशे की तरह साफ था, तो कप्तान साहब ने खुद हंटर चलाने में संकोच क्यों किया?
क्या इसे महज प्रशासनिक ढिलाई माना जाए या फिर अपने दायित्व का बोझ ‘ऊपर’ के कंधों पर डालने की कोई सोची-समझी चाल? पुलिसिंग के इस तरीके पर उठने वाली उंगलियां न सिर्फ सिस्टम को कमजोर करती हैं, बल्कि विभाग की छवि को भी गहरा जख्म देती हैं। ब्रांडवाणी समाचार इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष तफ्तीश और कड़ी कार्रवाई की पुरजोर वकालत करता है।
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