संजय पाठक पर 413 करोड़ का जुर्माना: राजनीति की साजिश या न्याय का प्रश्न?

ब्रांडवाणी फीचर:  जब राजनीति में कद व्यक्ति के व्यक्तित्व से बड़ा हो जाता है, तो अक्सर अपनों की नजरों में भी खटकने लगता है। मध्य प्रदेश की राजनीति के वरिष्ठ और कटनी के लोकप्रिय विधायक संजय पाठक के खिलाफ हाल ही में जो कार्रवाई हुई है, वह किसी बड़ी राजनीतिक योजना का संकेत देती है। 413 करोड़ रुपये का जुर्माना और इसे जल्दबाजी में लागू करना, शासन की नीयत पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

पांच बार निर्वाचित और शिक्षित विधायक, जिनको अनुशासन और संविधान का पूरा ज्ञान है, क्या वे न्यायपालिका की गरिमा से अनभिज्ञ हैं? यदि उन्होंने अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया, तो यह केवल एक पीड़ित का संवाद स्थापित करने का प्रयास था। लेकिन इसे जिस तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और हाईकोर्ट द्वारा भारी जुर्माना लगाया गया, वह संदेहास्पद है। क्या यह जुर्माना खनन से संबंधित है, या संजय पाठक की बढ़ती राजनीतिक ताकत को दबाने का प्रयास?

वहीं प्रदेश सरकार, जो सामान्य मामलों में सालों तक फाइलें लटकाती है, संजय पाठक के मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है। इस असामान्य तत्परता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

  1. क्या कुछ ताकतवर नेता संजय पाठक के नाम को मिट्टी में मिलाना चाहते हैं?
  2. क्या उनका मानना है कि एक स्थापित व्यवसायी और जननेता को आर्थिक रूप से कमजोर कर राजनीति से बाहर किया जा सकता है?

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उन नेताओ को आगाह होना चाहिए, जो सत्ता के नशे में अपनों पर ही वार कर रहे हैं: सत्ता केवल पांच साल के लिए होती है, आज जो शिखर पर हैं, कल गिर भी सकते हैं। संजय पाठक जैसे नेता, जिन्होंने जीवन जनता की सेवा और संगठन मजबूत करने में लगाया, उन्हें परेशान तो किया जा सकता है, पर परास्त नहीं किया जा सकता।

“संजय पाठक कल भी नेता थे, आज भी हैं और भविष्य में भी रहेंगे। वे वो मजबूत चट्टान हैं, जिनसे टकराकर साजिशें खुद टूट जाएंगी।”

कटनी की जनता आज अपने विधायक के साथ खड़ी है। प्रदेश सरकार को समझना चाहिए कि न्याय केवल कागजों पर नहीं, बल्कि निष्पक्षता में दिखना चाहिए। यदि किसी जननेता को गिराने के लिए तंत्र का दुरुपयोग होगा, तो इतिहास उसे कभी माफ नहीं करेगा। संजय पाठक का सम्मान कटनी का सम्मान है, और इसे राजनीति की भेंट चढ़ाना लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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