ट्रंप का बड़ा बयान: अमेरिका-ईरान समझौता होकर रहेगा, चाहे आसान हो या कठिन

तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत जारी है और यह वार्ता पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित की जा रही है।

दोनो देशों की अहम बातचीत फिर इस्लामाबाद में होगी 

अमेरिकी मीडिया अनुसार यह वार्ता पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही है, जहां अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले भी इसी महीने इस्लामाबाद में 21 घंटे तक लंबी बातचीत हो चुकी थी, लेकिन वह बिना किसी अंतिम समझौते के समाप्त हो गई थी।

ट्रंप का बड़ा बयान – अमेरिका किसी भी हाल में शांति चाहता है

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी चैनल ABC न्यूज से बातचीत में कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में शांति समझौता चाहता है। उन्होंने कहा कि ईरान ने हाल ही में सीजफायर के दौरान “गंभीर उल्लंघन” किए हैं, लेकिन फिर भी अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है।

ये भी पढ़े – ट्रम्प की ईरान को सख्त चेतावनी: “यूरेनियम हर हाल में लेंगे”, समझौता न हुआ तो फिर बमबारी

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सोमवार शाम तक इस्लामाबाद पहुंच जाएगा, जहां आगे की बातचीत होगी। उन्होंने यह भी कहा – “यह किसी न किसी तरह होगा. चाहे आसान तरीका हो या सख्त तरीका, समझौता होकर रहेगा।”

शुरुआत में अमेरिकी मीडिया में अलग-अलग रिपोर्ट्स आईं कि उपराष्ट्रपति JD Vance वार्ता का नेतृत्व करेंगे, लेकिन बाद में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से वे पाकिस्तान नहीं जाएंगे।

बैठक को लेकर इस्लामाबाद में हाई अलर्ट

वार्ता को देखते हुए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। होटल क्षेत्रों से कुछ लोगों को हटाया गया है और कई शैक्षणिक संस्थानों ने कक्षाएं ऑनलाइन कर दी हैं। प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध की भी संभावना जताई जा रही है।

इससे पहले इस्लामाबाद में हुई पहली वार्ता में करीब 21 घंटे की लंबी चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका था। मुख्य मुद्दों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा शामिल थी।

ये भी पढ़े – होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा फैसला: सीजफायर तक खुला रहेगा रास्ता, लेकिन तनाव बरकरार

  • trump-statement-us-iran-deal-will-happen-negotiation
  • Rashel Kachwah Rajput

    Rashel Kachwah Rajput

    14+ वर्षों का अनुभव। हर दिन, पल-पल की खबरों के साथ। निष्पक्ष व भरोसेमंद रिपोर्टिंग, हर खबर की गहराई तक पहुँचने का प्रयास। सच्ची पत्रकारिता, आपके भरोसे के साथ।

    Related Posts

    खंडवा बाल कल्याण समिति सदस्य स्वप्निल जैन और रुचि पाटिल ने प्रबन्धकीय अकादमी नरोन्हा भोपाल में 13 दिवसीय प्रशिक्षण में की सहभागिता ।*

    बाल कल्याण समिति के नवनियुक्त अध्यक्ष/सदस्यों के लिए आयोजित…

    आगे पढ़ें
    सोमवती अमावस्या पर जागेश्वरधाम में गर्भ गृह में नहीं प्रवेश, एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना 50 सीसीटीवी कैमरो से रखी जा रही नजर

    सोमवती अमावस्या पर जागेश्वरधाम में गर्भ गृह में नहीं…

    आगे पढ़ें

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    ‘राष्ट्रवाद’ का नया शोरूम: पोर्ट गया, एयरपोर्ट गया, सैनिक स्कूल गया… क्या अब सेना भी ‘साहब के मित्र’ की होगी?

    ‘राष्ट्रवाद’ का नया शोरूम: पोर्ट गया, एयरपोर्ट गया, सैनिक स्कूल गया… क्या अब सेना भी ‘साहब के मित्र’ की होगी?

    राष्ट्रपति भवन से लोकतंत्र का अपमान? 2 करोड़ जनता के दूतों को समय नहीं, आदिवासी महिला मीनाक्षी नटराजन का रास्ता रोकने के पीछे क्या है BJP की मंशा?

    राष्ट्रपति भवन से लोकतंत्र का अपमान? 2 करोड़ जनता के दूतों को समय नहीं, आदिवासी महिला मीनाक्षी नटराजन का रास्ता रोकने के पीछे क्या है BJP की मंशा?

    लोकतंत्र और न्यायपालिका पर उठते सवाल, दिग्विजय सिंह के बयान से सियासी भूचाल, क्या खतरे में है जनता का जनादेश?

    लोकतंत्र और न्यायपालिका पर उठते सवाल, दिग्विजय सिंह के बयान से सियासी भूचाल, क्या खतरे में है जनता का जनादेश?

    डिजिटल सम्मोहन, रील्स के दौर में खोते रिश्ते और बिखरता हुआ परिवार

    डिजिटल सम्मोहन, रील्स के दौर में खोते रिश्ते और बिखरता हुआ परिवार

    शिक्षा का ‘डेथ वारंट’: सरकारी स्कूलों का जनाज़ा, प्राइवेट माफिया का कब्ज़ा! क्या मुफ्त राशन के बदले बच्चों का भविष्य बेच रही है जनता?

    शिक्षा का ‘डेथ वारंट’: सरकारी स्कूलों का जनाज़ा, प्राइवेट माफिया का कब्ज़ा! क्या मुफ्त राशन के बदले बच्चों का भविष्य बेच रही है जनता?