
धार: अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित मोहनखेड़ा महातीर्थ में भव्य धार्मिक आयोजन हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ‘आदि-राज पारणोत्सव’ में शामिल हुए और गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज का सान्निध्य प्राप्त किया। इस कार्यक्रम में 550 से अधिक तपस्वियों का पारणा विधिवत संपन्न हुआ, जिससे पूरे क्षेत्र में आस्था और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला।
मोहनखेड़ा में पारणोत्सव का महत्व क्या है?
अक्षय तृतीया के अवसर पर आयोजित ‘आदि-राज पारणोत्सव’ जैन समाज का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है। इस दिन तपस्वी अपने कठिन व्रत और साधना का समापन पारणा के माध्यम से करते हैं। मोहनखेड़ा महातीर्थ देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग इस आयोजन में शामिल होते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा और कौन-कौन रहा मौजूद?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर विधिवत पूजन-अर्चन कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने संतों के सान्निध्य को जीवन का सौभाग्य बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलता है। इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री चेतन कश्यप, स्थानीय विधायक और कई जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
550 तपस्वियों का पारणा क्यों खास रहा?
इस बार पारणोत्सव में 550 से अधिक तपस्वियों का एक साथ पारणा होना अपने आप में विशेष रहा। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में अनुशासन, संयम और साधना के महत्व को भी दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
धार के मोहनखेड़ा में आयोजित यह पारणोत्सव आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। मुख्यमंत्री की उपस्थिति और बड़ी संख्या में तपस्वियों की भागीदारी ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
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