
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी प्रवास के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने घड़ी की कार्यप्रणाली और भारतीय वैदिक कालगणना प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी ली। यह विशेष घड़ी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर तैयार की गई है और पिछले कुछ समय से देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
समय गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
उज्जैन की वैदिक परंपरा पर आधारित यह घड़ी सामान्य डिजिटल घड़ियों से अलग है। इसमें केवल समय ही नहीं, बल्कि पंचांग, शुभ मुहूर्त, ग्रहों की स्थिति, सूर्योदय और सूर्यास्त जैसी जानकारियां भी प्रदर्शित होती हैं। इसकी समय गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के चक्र पर आधारित मानी जाती है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट
जानकारी के अनुसार, इस वैदिक घड़ी को कुछ सप्ताह पहले काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित किया गया था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया था। इसके बाद से यह घड़ी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
भारतीय वैदिक समय प्रणाली वैज्ञानिक दृष्टि से समृद्ध और सटीक
मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार उज्जैन को भारतीय कालगणना और खगोलीय अध्ययन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि भारतीय वैदिक समय प्रणाली वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद समृद्ध और सटीक है, जिसे आधुनिक तकनीक के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ जैसी पहल को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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