
बुरहानपुर: जिले के ग्राम बोर्सल से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है, जहां दिव्यांग मनोज मधुकर महाजन पिछले चार वर्षों से ट्राइसाइकिल के लिए कलेक्ट्रेट और जनसुनवाई के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक यह सुविधा नहीं मिल सकी है।
मनोज महाजन शारीरिक रूप से विकलांग हैं और उनके लिए ट्राइसाइकिल केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवनयापन का सहारा है। वे लगातार हर सप्ताह और महीने कलेक्ट्रेट पहुंचकर आवेदन दे रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। आज एक बार फिर वे जनसुनवाई में पहुंचे, इस उम्मीद के साथ कि शायद इस बार उन्हें ट्राइसाइकिल मिल जाएगी, लेकिन वे फिर निराश होकर लौटे।
पीड़ित का बयान:
मनोज महाजन ने बताया, “मैं चार साल से लगातार कलेक्ट्रेट के चक्कर लगा रहा हूं, हर बार कहते हैं मिल जाएगी, लेकिन आज तक नहीं मिली… आने-जाने में बहुत परेशानी होती है।”
सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि सामाजिक न्याय विभाग के परिसर में ट्राइसाइकिलें धूल खाती नजर आती हैं, लेकिन जरूरतमंदों तक वह नहीं पहुंच पा रही हैं। मौके पर मीडिया द्वारा यह स्थिति कैमरे में कैद की गई।
वहीं विभागीय अधिकारी स्टॉक की कमी का हवाला दे रहे हैं। सवाल उठता है कि यदि स्टॉक उपलब्ध नहीं है तो परिसर में रखी ट्राइसाइकिलें किसके लिए हैं, और यदि उपलब्ध हैं तो पात्र हितग्राहियों तक क्यों नहीं पहुंच रहीं।
सामाजिक कार्यकर्ता का बयान:
सामाजिक कार्यकर्ता प्रियांक ठाकुर ने कहा कि यह पूरी तरह सिस्टम की विफलता है, जहां जरूरतमंद को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही है।
अधिकारी का पक्ष:
सामाजिक न्याय विभाग के जिला अधिकारी दुर्गेश दुबे ने बताया कि फिलहाल ट्राइसाइकिल का स्टॉक उपलब्ध नहीं है और मांग उच्च स्तर पर भेजी गई है। उपलब्ध होते ही पात्र हितग्राहियों को वितरण किया जाएगा।
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