
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्षभर हरे और पोषक आहार के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश पशुधन विभाग ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। प्रदेश सरकार के किसान पशुपालकों को नेपियर घास के रूट के टुकड़े, ब्रूम और जार के बीज का उत्पादन कर रही है, ताकि हरे चारे का उत्पादन स्केल जा सके और पशुपालकों की लागत कम हो।
पशुधन, दुग्ध विकास एवं मत्स्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि सरकार के लक्ष्य प्रदेश में सागर को साल भर सस्ता और पोषक हरा चारा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय में भी सुधार होगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 75 हजार हेक्टेयर भूमि पर हरा चारा उगाने की तैयारी शुरू हो गयी है। सरकार इस अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
सबसे ज्यादा जोर नेपियर घास की खेती को बढ़ावा देने पर है, क्योंकि इसकी कटाई साल में छह गुना तक हो सकती है और यह फसल के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती है। पशुपालक विभाग के संयुक्त निदेशक सुनील कुमार राय ने बताया कि अतिरिक्त चारा विकास कार्यक्रम के तहत किसानों और पशुपालकों को मुर्गी और चारा बीज पिलाया जाता है। इससे करीब 4,156 हेक्टेयर भूमि में हरे चारे का निर्माण होगा। इस योजना पर विभाग ने लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किये हैं।
इसके अलावा इस वर्ष 230 हेक्टेयर क्षेत्र में नेपियर घास उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत 75 लाख रुपये में 60 लाख नेपियर रूट के टुकड़ों का वितरण किया गया, जिस पर करीब 64 लाख रुपये खर्च हुए। किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में 4 हजार रुपये भी दिए जा रहे हैं। पर्यटन भूमि और गो आश्रय स्थलों में भी उत्पादन बढ़ाने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इसके तहत 2,815 हेक्टेयर भूमि में ज्वार, मक्का और बाजरा के बीज डाले गए, जिस पर विभाग ने 6.5 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
सरकार केवल बीज वितरण तक सीमित नहीं चाहती, बल्कि बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए किसानों और पशुपालकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक जिले से कृषि एवं चारागाह विभाग के दो अधिकारियों को भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान में प्रशिक्षण संस्था जा रही है। यही अधिकारी मास्टर ट्रेनर उभर विकासखंड स्तर पर किसानों को हरा चारा ओबने की तकनीक सिखाएंगे।
इसके अलावा प्रत्येक जिले से 15-15 किसानों और पशुपालकों को तकनीकी और डिविजनल क्षेत्रों में एक्सपोज़र बिल्डरों को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को समझ सकें और अपने क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन कर सकें।
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