
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से फ़्राईल परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। योगी आदित्यनाथ सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में लाखों कन्या विवाह के तरीके शामिल हैं। शादी जैसे बड़े सामाजिक कार्यक्रम में होने वाले भारी खर्च से संबंधित परिवार को इस योजना से आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर सहारा मिल पर रखा जा रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक करीब 76,522 विवाह इस योजना के तहत चल रहे अंतिम वर्ष घोषित किए गए हैं। यह चित्र योजना की प्रमुख विशेषताएँ और लोगों की विशेषताएँ हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के प्रारंभ वर्ष 2017-18 में परिवार की बेटी का सम्मान विवाह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया। योजना के तहत एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। 60 हजार रुपये सीधे वधू के बैंक में भेजे जाते हैं, जबकि 25 हजार रुपये के उपहार और घरेलू उपयोग के सामान दिए जाते हैं।
इसके अलावा 15 हजार रुपये विवाह समारोह के उत्सव पर खर्च किये जाते हैं। योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विविधता व्यवस्था है। सहायता राशि सीधे ग्राहक के खाते में प्रकाशित होती है, जिससे बिचौली की भूमिका समाप्त हो गई है और आयुक्त की संभावना कम हो गई है।
सामूहिक विवाह समारोह में सरकार की ओर से खान-पान, भोजन, सजावट और अन्य व्यवस्थाएं दी जाती हैं। नवविवाहित जोड़ों में फ़्लोरेसी, पॉश्चर, पाइलिया, बिछिया सहित अन्य आवश्यक घरेलू सामान भी उपलब्ध हैं। इससे गरीब परिवार का आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है और वे बिना तनाव के अपनी बेटी की शादी कर लेते हैं।
समाज कल्याण विभाग के अनुसार योजना का लाभ परिवार का अनुपात वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है। आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन और सरल बनाया गया है, ताकि अधिक से अधिक पर्यटन परिवार योजना का लाभ उठाया जा सके। विकलांग परिवार विवाह अनुदान पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।
यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सामूहिक विवाह समारोहों में विभिन्न समूहों और समूहों के लोग एक मंच पर विवाह संस्कार लागू करते हैं, जिससे समाज में सद्भाव और भाईचारे का संदेश भी मजबूत हो रहा है।
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