पद्मा बैराज परियोजना को मंजूरी: बांग्लादेश सरकार खर्च करेगी 34,497 करोड़ टका, जल संसाधन मंत्री का बोले- पद्मा बैराज बांग्लादेश का निजी मामला, भारत से चर्चा की जरूरत नहीं

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश सरकार ने बुधवार शाम को पद्मा नदी (गंगा) पर एक बड़े बैराज प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि यह परियोजना भारत के फरक्का बैराज के डाउनस्ट्रीम प्रभावों को कम करने और देश में जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। बांग्लादेश के राष्ट्रीय आर्थिक परिषद (ECNEC) की कार्यकारी समिति ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता में परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दी।

इसकी अनुमानित लागत लगभग 34,497 करोड़ टका (करीब 280 मिलियन अमेरिकी डॉलर) बताई गई है। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पद्मा नदी के पानी को नियंत्रित कर सूखे मौसम में जल उपलब्धता सुनिश्चित करना और फरक्का बैराज के कारण होने वाले कथित प्रभावों को कम करना है।

 

हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत-बांग्लादेश के बीच साझा 54 नदियों से जुड़े मुद्दे इस परियोजना का हिस्सा नहीं हैं।  मंत्रालय ने कहा कि यह परियोजना पूरी तरह बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित में है और इसके लिए भारत से किसी प्रकार की बातचीत आवश्यक नहीं मानी गई है। हालांकि, गंगा जल बंटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता जारी रहने की बात भी कही गई है।

भारत ने वर्ष 1975 में पश्चिम बंगाल में 2,240 मीटर लंबा फरक्का बैराज बनाया था, जिसका उद्देश्य हुगली नदी में जल प्रवाह बढ़ाकर कोलकाता बंदरगाह की नौवहन क्षमता बनाए रखना था। बांग्लादेश लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि सूखे मौसम में पानी की कमी के कारण उसके निचले इलाकों में खारापन बढ़ता है, कृषि और पारिस्थितिकी पर असर पड़ता है। भारत का पक्ष रहा है कि फरक्का बैराज का उद्देश्य मुख्य रूप से बंदरगाह संरक्षण है और जल-बंटवारे के मुद्दे पहले से मौजूद समझौतों के तहत सुलझाए जाते रहे हैं, जिसमें 1996 का गंगा जल संधि प्रमुख है।

परियोजना का उद्देश्य और दायरा

बांग्लादेश सरकार के अनुसार यह परियोजना 2033 तक पूरी करने का लक्ष्य रखती है और इसका दायरा राजशाही, ढाका और बरिशाल डिवीजन के 19 जिलों तक फैला होगा। परियोजना के तहत नदियों की प्रवाह क्षमता बढ़ाने, जलमार्गों की नौवहन क्षमता सुधारने, खारे पानी के प्रवेश को रोकने और कृषि, मत्स्य पालन तथा जैव विविधता को मजबूत करने की योजना है। इसके अलावा, परियोजना के तहत 113 मेगावाट क्षमता के दो जलविद्युत संयंत्र (हाइड्रोपावर प्लांट) भी प्रस्तावित हैं।

ये भी पढ़े – बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप गहराया: अब तक 424 की मौत, सरकार ने दिए जांच के आदेश

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