किसानों की समृद्धि का आधार बनी योगी सरकार की ‘खेत तालाब योजना’, डिजिटल पारदर्शी व्यवस्था से मिल रहा सीधा लाभ

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार कई योजनाओं को धरातल पर उतार रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाई जा रही ‘खेत तालाब योजना’ किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और लाभकारी पहल साबित हो रही है। यह योजना जल संरक्षण, सिंचाई सुविधा और अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार का एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का संचयन कर किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी और भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित इस योजना में खेतों के भीतर तालाब बनाए जाते हैं, जिससे बरसात का पानी संरक्षित हो सके और सूखे के समय उसका उपयोग खेती में किया जा सके। वर्तमान समय में जब भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, ऐसे में यह योजना किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है।

सरकार इस योजना के तहत किसानों को कुल लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। 22 मीटर × 20 मीटर × 3 मीटर आकार के खेत तालाब की अनुमानित लागत ₹1,05,000 है, जिसमें ₹52,500 का अनुदान किसानों को दिया जाता है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी योजना से जोड़ने में मदद मिल रही है। इसके अलावा सरकार स्प्रिंकलर सेट पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान और पम्पसेट पर ₹15,000 या 50 प्रतिशत तक सहायता भी उपलब्ध करा रही है, जिससे सिंचाई लागत में काफी कमी आ रही है।

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खेत तालाब योजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर भी प्रदान कर रही है। किसान इन तालाबों में मत्स्य पालन, मोती उत्पादन, सिंघाड़ा उत्पादन और अन्य जलीय खेती कर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। इससे कृषि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है और किसान अब केवल परंपरागत खेती पर निर्भर नहीं रह गए हैं।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था है। किसानों का चयन ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग के आधार पर ‘प्रथम आओ, प्रथम पाओ’ के सिद्धांत पर किया जा रहा है। इससे किसी प्रकार की सिफारिश या भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हो गई है और पात्र किसानों को सीधे लाभ मिल रहा है। किसान घर बैठे ही आवेदन कर सकते हैं और उन्हें सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

योजना के तहत अनुदान दो चरणों में दिया जाता है। पहला चरण तालाब की खुदाई पूरी होने के बाद और दूसरा चरण इनलेट व्यवस्था व डिस्प्ले बोर्ड लगाने के बाद पूरा किया जाता है। आवेदन के लिए किसान की फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य है। साथ ही ऑनलाइन आवेदन के समय ₹1000 की टोकन मनी जमा करनी होती है, जो बाद में वापस कर दी जाती है। आवेदन प्रक्रिया कृषि विभाग के पोर्टल Agri darshan पर उपलब्ध है।

कानपुर नगर के भूमि संरक्षण अधिकारी आर.पी. कुशवाहा ने बताया कि यह योजना किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार खेत तालाब बनने से न केवल सिंचाई की समस्या हल हो रही है, बल्कि फसल उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है और किसान मौसम पर निर्भरता से मुक्त हो रहे हैं। हजारों किसान इस योजना का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।

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    Rashel Kachwah Rajput

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