बड़वानी में ‘खाद कांड’ पर सियासत गरमाई, तीन दिन बाद भी FIR नहीं, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बड़वानी:  जिले में संदिग्ध खाद परिवहन का मामला अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। ग्राम करी और सेगांव के बीच रात के अंधेरे में एक ट्रक से खाद की बोरियां उतारकर ट्रैक्टरों में भरे जाने का मामला सामने आया था, जिसे किसानों ने मौके पर पकड़ लिया था। घटना के तीन दिन बाद भी न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही प्रशासन की ओर से किसी तरह की ठोस कार्रवाई की गई है, जिससे कृषि विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले ग्रामीणों और किसानों ने रात के समय संदिग्ध गतिविधियां देखीं, जिसके बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर ट्रक चालक से पूछताछ की। संतोषजनक जवाब न मिलने पर किसानों ने तत्काल इसकी सूचना एसडीएम और कृषि विभाग को दी। इसके बाद एसडीएम भूपेंद्र रावत के निर्देश पर कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ट्रक में भरी खाद की बोरियों को जब्त कर वेयरहाउस में रखवा दिया गया।

हालांकि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब भी अनसुलझा है कि यह खाद कहां से लाई गई थी, किसके लिए ले जाई जा रही थी और रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों में क्यों भरी जा रही थी। कृषि विभाग अब तक इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया है। सूत्रों के अनुसार, कृषि विभाग का अमला एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने भी पहुंचा था, लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

इधर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने मामले को गंभीर बताते हुए अंजड़ तहसील कार्यालय में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ट्रक चालक और ट्रक मालिक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग उठाई है। किसान संगठन का कहना है कि यदि मामला गंभीर नहीं था तो रात में कार्रवाई क्यों की गई और यदि गंभीर था तो अब तक कार्रवाई पूरी क्यों नहीं हुई। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि खाद की कालाबाजारी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मामले में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी। वहीं जिला प्रशासन और कलेक्टर स्तर से भी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। किसानों और संगठनों का आरोप है कि यह मामला अब प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही की परीक्षा बन गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

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    Rashel Kachwah Rajput

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