
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश की आंगनबाड़ी व्यवस्था लगातार मजबूत, आधुनिक और तकनीक-सक्षम होती जा रही है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग की योजनाओं के जरिए प्रदेश की लाखों आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को न केवल आर्थिक मजबूती मिली है, बल्कि उन्हें समाज में एक नई पहचान और सम्मान भी प्राप्त हुआ है।
प्रदेश में वर्तमान समय में 1,83,049 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और 1,61,491 सहायिकाएं कार्यरत हैं, यानी कुल करीब 3.44 लाख महिलाएं गांव-गांव में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल की जिम्मेदारी निभा रही हैं। सरकार ने इन्हें केवल मानदेय आधारित कर्मचारी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में स्थापित किया है।
योगी सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि में भी सुधार किया गया है। कार्यकत्रियों को 8 हजार रुपये और सहायिकाओं को 4 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इसके अलावा कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, जिसमें पूरक पोषण का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित करने पर कार्यकत्रियों को 500 रुपये और सहायिकाओं को 400 रुपये अतिरिक्त मिलते हैं।
वहीं पोषण ट्रैकर पर लाभार्थियों की पूरी फीडिंग करने पर कार्यकत्रियों को 1,000 रुपये और सहायिकाओं को 350 रुपये तक अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की निदेशक हर्षिता माथुर के अनुसार, आंगनबाड़ी व्यवस्था को तकनीक से जोड़कर पूरी तरह आधुनिक बनाया गया है। पोषण ट्रैकर प्रणाली के माध्यम से अब लाभार्थियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन रखा जा रहा है, जिससे योजनाओं की निगरानी अधिक पारदर्शी और प्रभावी हो गई है।
उन्होंने बताया कि फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए 98.76 प्रतिशत लाभार्थियों का पंजीकरण पूरा किया जा चुका है, जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगी है और योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच रहा है। स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के लिए 3,16,724 आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं, जिससे उन्हें निःशुल्क और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। इससे लाखों महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार मिला है। तकनीक, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के इस संयोजन ने आंगनबाड़ी व्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, जिससे ग्रामीण स्तर पर महिला नेतृत्व और सामाजिक जागरूकता को भी मजबूती मिली है।
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