
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल ने अब वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना ली है। उत्तर प्रदेश में देशी गायों के संरक्षण और उनके उत्पादों पर आधारित यह एथिकल डेयरी मॉडल अब न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है, बल्कि यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया सहित 10 से अधिक देशों में ‘मेड इन यूपी’ गो-उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
इस मॉडल के तहत एक हजार से अधिक देशी गायों के सहारे करीब 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार खड़ा किया गया है। इसे एक आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें देशी नस्लों को संरक्षित करते हुए उन्हें बाजार से जोड़ा गया है। इस पहल ने ‘गो-इकोनॉमी’ को नई दिशा दी है।
‘हेता’ (HETHA) नामक इस एथिकल डेयरी सिस्टम के जरिए देशी गायों के समग्र उपयोग पर काम किया जा रहा है। यहां दूध के साथ-साथ पंचगव्य आधारित उत्पाद, आयुर्वेदिक औषधियां और वेलनेस प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं। A2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन और हेयर केयर प्रोडक्ट्स सहित करीब 150 प्रकार के उत्पाद तैयार कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजे जा रहे हैं।
इस मॉडल की शुरुआत सिकंदरपुर, गाजियाबाद के असीम रावत ने की, जिन्होंने 14 वर्षों तक अमेरिका और अन्य देशों की सॉफ्टवेयर कंपनियों में इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद गो संरक्षण को अपना मिशन बनाया। वर्तमान में उनकी 100 सदस्यीय टीम इस मॉडल को संचालित कर रही है, जिसे अब एक ग्लोबल ब्रांड के रूप में विकसित किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय का गोपूजन और आरती कर चुके हैं, जिससे इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। पशुपालन विभाग के अनुसार, प्रदेश सरकार इस मॉडल को विस्तार देने के लिए लगातार नीतिगत सहयोग दे रही है। ‘ऑपरेशन-4’ के तहत स्वदेशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। डेयरी मास्टर प्लान के अंतर्गत 2 से 25 गायों तक के पालन पर 15 प्रतिशत स्वयं निवेश, 35 प्रतिशत बैंक ऋण और 50 प्रतिशत सरकारी अनुदान का प्रावधान किया गया है।
सरकार साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी जैसी देशी नस्लों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है। इस प्रयास से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। अधिकारियों के अनुसार यह ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल उत्तर प्रदेश को वैश्विक डेयरी शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है, जिससे देशी नस्लों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो रहा है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
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