
नई दिल्ली/अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शिष्टाचार मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की सेवा के शानदार 12 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे होने पर हार्दिक बधाई दी। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री साहा ने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली ऐतिहासिक और अभूतपूर्व जीत के लिए भी प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दीं। मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) और फेसबुक पोस्ट के जरिए जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री के साथ हुई इस बैठक में त्रिपुरा के समग्र विकास, आर्थिक प्रगति और आगामी संगठनात्मक मुद्दों पर बेहद विस्तार से और सकारात्मक चर्चा संपन्न हुई है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व में देश की जनता का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम जनता के इसी अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक हैं।
इस कूटनीतिक और संगठनात्मक बैठक के मुख्य एजेंडे के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ राज्य के आर्थिक विकास को गति देने, सुशासन (गुड गवर्नेंस) सुनिश्चित करने और संगठन को जमीनी स्तर तक और अधिक मजबूत व सक्रिय बनाने की रणनीतियों पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनका विजन देश को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है। माणिक साहा ने जोर देकर कहा कि भारत के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में आए क्रांतिकारी बदलाव, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी दूरगामी कल्याणकारी योजनाओं ने देश के करोड़ों नागरिकों को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को एक नई ऊंचाई मिली है।
इस मुलाकात के दौरान एक बेहद खास और आध्यात्मिक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को पूर्वोत्तर के प्रसिद्ध और अत्यंत पवित्र माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर तथा उसके पुनर्विकसित किए गए आधुनिक परिसर की एक भव्य तस्वीर भेंट की। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रसाद’ योजना के तहत इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर का व्यापक और भव्य स्तर पर कायाकल्प किया गया है, जिसके बाद अब देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां सुगमता से दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। पर्यटन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दी गई तकनीकी जानकारी के अनुसार, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ‘प्रसाद’ (पिलग्रिमेज रीजुवेनेशन एंड स्पिरिचुअल हेरिटेज ऑगमेंटेशन ड्राइव) योजना के तहत इस 524 वर्ष पुराने प्राचीन त्रिपुरा सुंदरी मंदिर का पुनर्विकास कुल 54 करोड़ रुपए से अधिक की भारी-भरकम लागत से किया गया है। इस भव्य जीर्णोद्धार परियोजना में केंद्र सरकार ने 34.43 करोड़ रुपए और त्रिपुरा की राज्य सरकार ने 17.61 करोड़ रुपए का महत्वपूर्ण वित्तीय योगदान दिया है।
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से यह मंदिर बेहद खास और पौराणिक महत्व रखता है। उदयपुर में स्थित इस भव्य मंदिर का निर्माण वर्ष 1501 में तत्कालीन राजा महाराजा धन्य माणिक्य द्वारा करवाया गया था। यह पावन स्थल देश के प्रतिष्ठित 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जो धार्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र है। पूर्वी भारत में कोलकाता के कालीघाट मंदिर और गुवाहाटी के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के बाद माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर को तीसरा सबसे प्रमुख और जागृत शक्तिपीठ स्वीकार किया जाता है। इसके साथ ही, त्रिपुरा का इतिहास भी बेहद गौरवशाली रहा है, जहां लगभग 517 वर्षों तक राजशाही व्यवस्था लागू रही थी। इसके बाद, 15 अक्टूबर 1949 को त्रिपुरा का आधिकारिक रूप से भारतीय संघ में विलय हुआ था। तत्कालीन रीजेंट महारानी कंचन प्रभा देवी और भारत के गवर्नर जनरल के बीच हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद ही त्रिपुरा भारतीय गणराज्य का एक अभिन्न हिस्सा बना था, जिसकी विकास यात्रा को अब प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री माणिक साहा की ‘डबल इंजन’ सरकार मिलकर नई गति दे रही है।
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