
लखनऊ/राशिद सिद्दीकी की रिपोर्ट: भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपने संगठन को अंतिम रूप देते हुए शेष बचे पांच जिलों के कप्तानों (जिलाध्यक्षों) के नामों का आधिकारिक एलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने गुरुवार को इन नियुक्तियों पर मुहर लगाई। इसके तहत अम्बेडकरनगर, वाराणसी, चंदौली, गोरखपुर महानगर और देवरिया जिलों में नए जिलाध्यक्षों की तैनाती की गई है। इस सांगठनिक फेरबदल के जरिए भाजपा ने न सिर्फ अपने कैडर को बूथ स्तर पर सक्रिय करने का संदेश दिया है, बल्कि आगामी सियासी चुनौतियों के मद्देनजर जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को भी पूरी तरह दुरुस्त करने की कोशिश की है।
पार्टी द्वारा जारी आधिकारिक सूची के अनुसार, दिलीप देव पटेल को अम्बेडकरनगर का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की कमान राम सकल पटेल को सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, काशी नाथ सिंह को चंदौली, रमेश प्रसाद गुप्ता को गोरखपुर महानगर और काली प्रसाद को देवरिया का जिलाध्यक्ष घोषित किया गया है। इन नई नियुक्तियों के सामने आते ही संबंधित जिलों के कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और नए पदाधिकारियों ने जमीनी स्तर पर आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों को सफल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
सपा के ‘पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक’ के सामने भाजपा का ‘पिछड़ा-दलित-अगड़ा’ दांव
इस सांगठनिक फेरबदल के पीछे भाजपा की एक बेहद सोची-समझी और आक्रामक चुनावी रणनीति छिपी है। दरअसल, उत्तर प्रदेश संगठन में इस आमूलचूल बदलाव के जरिए भाजपा सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी (सपा) के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट तलाश रही है। भाजपा ने इसके जवाब में अपने खुद के ‘PDA’ यानी ‘पिछड़ा, दलित और अगड़ा’ समीकरण को आगे बढ़ाया है। इसी सोशल इंजीनियरिंग को जमीन पर उतारने के लिए पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी छह क्षेत्रीय इकाइयों के अध्यक्षों और सातों मोर्चों के अध्यक्ष पदों में भी जल्द बड़ा बदलाव करने जा रही है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी किसी भी वक्त अपनी पूरी नई टीम की घोषणा कर सकते हैं।
नई कार्यकारिणी में 50 फीसदी नए चेहरों को तरजीह, कई स्तरों पर संवाद के बाद बनी सूची
तय रणनीति के मुताबिक, आगामी संगठन और नई कार्यकारिणी में संतुलन साधने के लिए अति पिछड़ा, गैर-यादव पिछड़ा और अगड़ा वर्ग को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। सांगठनिक सूत्रों का दावा है कि नई प्रदेश कार्यकारिणी में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक नए और युवा चेहरों को जगह दी जाएगी ताकि संगठन में नई ऊर्जा का संचार हो सके। इस बेहद महत्वपूर्ण सूची को अंतिम रूप देने के लिए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, संगठन महासचिव बीएल संतोष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ कई दौर की गहन समीक्षा बैठकें की थीं, जिसके बाद ही इस फाइनल खाके को केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिली है।
लोकसभा चुनाव के नतीजों से लिया सबक, नाराज जातियों को फिर से जोड़ने की कवायद
भाजपा के इस बड़े फेरबदल के केंद्र में बीते लोकसभा चुनाव के परिणाम और जमीनी फीडबैक भी साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं। पिछले चुनाव में अति पिछड़ा वर्ग की कुछ जातियों जैसे कश्यप, कहार, प्रजापति, बिंद और बुनकर समाज के साथ-साथ कुर्मी और दलित वर्ग की पासी, कोरी, वाल्मिकी एवं खटीक जातियों के एक हिस्से का झुकाव सपा-कांग्रेस गठबंधन की तरफ हो गया था, जिससे भाजपा का पारंपरिक चुनावी गणित प्रभावित हुआ था। अब नई टीम और नए जिलाध्यक्षों के जरिए भाजपा की रणनीति क्षेत्रवार समीकरणों को अपने पाले में करने और इन रूठी हुई जातियों को फिर से मुख्यधारा में जोड़कर संगठन को अजेय बनाने की है।
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