
बुडापेस्ट: हंगरी के नवनियुक्त प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने देश के राष्ट्रपति तामस सुल्योक के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए उन्हें पद से हटाने के लिए संविधान में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। सोमवार को सैंडोर पैलेस के बाहर आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीएम मग्यार ने राष्ट्रपति सुल्योक की प्रशासनिक नाकामियों और गलत फैसलों की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने हंगरी के आम लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है, ठीक उसी तरह उनके द्वारा नियुक्त किए गए राष्ट्रपति तामस सुल्योक ने भी हंगरी रिपब्लिक को पूरी तरह छोड़ दिया है। मग्यार ने जोर देकर कहा कि रिपब्लिक के राष्ट्रपति का कार्यालय किसी भी देश के प्रमुख से कहीं अधिक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली होता है, इसलिए हंगरी के व्यापक हित में यह बेहद जरूरी है कि प्रेसिडेंसी को वह नैतिक अथॉरिटी और ताकत वापस मिले जो हाल के वर्षों में राष्ट्रपति की चुप्पी, उनके गलत निर्णयों और गंभीर गलतियों की वजह से कमजोर हुई है।
हंगरी के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने राष्ट्रपति सुल्योक के साथ हुई अपनी हालिया बैठक में उन्हें अपनी स्थिति से साफ तौर पर अवगत करा दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि वह सम्मानपूर्वक अपने पद से खुद इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वह अपनी पार्टी ‘टिस्जा’ के संसद सदस्यों MP को इस फैसले की जानकारी देकर राष्ट्रपति को हटाने की जरूरी संवैधानिक प्रक्रिया तुरंत शुरू कर देंगे। हालांकि प्रधानमंत्री ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि सरकार किस तरह का संस्थागत सुधार करना चाहती है, लेकिन उन्होंने यह जरूर साफ किया कि यह किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाकर बनाया गया कानून नहीं होगा, बल्कि एक ऐसा स्थाई फ्रेमवर्क होगा जिससे भविष्य में भी काम न करने वाले स्टेट लीडर्स को उनके ऑफिस से हटाया जा सके।
प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने कहा कि वह चाहते हैं कि आगामी सुधारों के तहत देश की जनता को सीधे तौर पर राष्ट्रपति चुनने का ज्यादा अधिकार मिले क्योंकि फंडामेंटल लॉ के अनुसार रिपब्लिक का प्रेसिडेंट देश की एकता का प्रतीक होता है और राज्य के लोकतांत्रिक कामकाज को सुरक्षित रखता है। राष्ट्रपति सुल्योक की विफलताओं को विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि जब पूर्व पीएम विक्टर ओरबान ने बग्स, बड़ी सफाई और एक शैडो आर्मी के बारे में बात की थी, तो देश के संवैधानिक प्रमुख होने के बावजूद सुल्योक ने इस पर रहस्यमयी चुप्पी साधे रखी और कोई बयान नहीं दिया। पीएम ने बताया कि जब उन्होंने खुद राष्ट्रपति से ओरबान के इस विवादित बयान के बारे में पूछा, तो उन्हें बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब मिला कि वे सिर्फ एक राजनीतिक राय थीं और राष्ट्रपति को इस तरह के मुद्दों पर बोलने की कोई आवश्यकता नहीं थी।
गौरतलब है कि मई 2026 की शुरुआत में ही हंगरी की ‘टिस्जा’ पार्टी के कद्दावर नेता पीटर मग्यार ने नई नेशनल असेंबली के पहले सत्र के दौरान संसदीय वोट में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद हंगरी के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। संसद में हुए इस महत्वपूर्ण शक्ति परीक्षण के दौरान कुल 199 सांसदों में से 195 ने मतदान किया था, जिसमें मग्यार के पक्ष में 140 वोट और विरोध में 54 वोट पड़े थे, जबकि एक सांसद ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था। अपने ऐतिहासिक पहले भाषण में प्रधानमंत्री मग्यार ने देश की जनता को आश्वस्त किया था कि उनकी नई सरकार को जनता से न सिर्फ सरकार बदलने का बल्कि पूरे भ्रष्ट सिस्टम को बदलने का मजबूत जनादेश मिला है। उन्होंने हंगरी की जनता पर तानाशाही राज करने के बजाय पूरी निष्ठा से देश की सेवा करने की कसम खाई है, जिसमें सामाजिक सुलह, लोकतांत्रिक नवीनीकरण और राष्ट्रीय एकता पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
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