झांसी में देश की सबसे आधुनिक औद्योगिक स्मार्ट सिटी को हरी झंडी: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बीडा मास्टर प्लान-2045 को दी अंतिम मंजूरी, 5.6 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

लखनऊ/झांसी: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित की जा रही बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIDA) की महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल सिटी परियोजना को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से आधिकारिक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त हो गई है। करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना बुंदेलखंड क्षेत्र के औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक विकास में मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

253 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकसित होगी औद्योगिक नगरी

बीडा मास्टर प्लान-2045 के तहत यह परियोजना 253.33 वर्ग किलोमीटर (62,599.20 एकड़) क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इसमें झांसी तहसील के 33 ग्रामीण क्षेत्र शामिल किए गए हैं। परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड को देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में विकसित करना है, जिससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार के अनुसार इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 5.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है।

कई चरणों में पूरी हुई पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया

परियोजना को मंजूरी मिलने से पहले पर्यावरणीय मानकों के तहत विस्तृत प्रक्रिया अपनाई गई। विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने जून 2025 में परियोजना का परीक्षण किया था। इसके बाद जुलाई 2025 में प्रारंभिक स्वीकृति प्रदान की गई। स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दिसंबर 2025 में जनसुनवाई आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने परियोजना का समर्थन किया। मार्च और अप्रैल 2026 में परियोजना के तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं की गहन समीक्षा की गई। सभी आवश्यक मानकों को संतोषजनक पाए जाने के बाद मंत्रालय ने अंतिम पर्यावरणीय स्वीकृति जारी कर दी।

औद्योगिक विकास के लिए विशेष क्षेत्र

मास्टर प्लान के अनुसार कुल भूमि का लगभग 33 प्रतिशत क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों के लिए आरक्षित किया गया है। यहां कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, रक्षा उत्पादन, वस्त्र उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण तथा अन्य आधुनिक उद्योग स्थापित किए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त:

  • 16.90 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय विकास के लिए निर्धारित किया गया है।
  • 24.92 प्रतिशत क्षेत्र हरित एवं मनोरंजक गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा गया है।
  • 11.56 प्रतिशत क्षेत्र परिवहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विकास के लिए आरक्षित किया गया है।
  • व्यावसायिक, संस्थागत और मिश्रित उपयोग के लिए भी अलग भूमि निर्धारित की गई है।

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पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर

परियोजना को पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक शहर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। कुल क्षेत्रफल का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा हरित क्षेत्र के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। परियोजना सीमा पर 50 मीटर चौड़ा तथा डोंगरी बांध के आसपास 150 मीटर चौड़ा ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण भी किया जाएगा।

शून्य तरल विसर्जन की व्यवस्था

बीडा परियोजना में जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। शहर की पेयजल आवश्यकता राजघाट बांध से पूरी की जाएगी, जबकि औद्योगिक और अन्य उपयोगों के लिए उपचारित जल का उपयोग किया जाएगा।

इसके लिए:

  • 163.26 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)
  • 150.88 एमएलडी क्षमता का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP)

स्थापित किए जाएंगे। उपचारित जल का पुनः उपयोग किया जाएगा और किसी भी प्रकार का अपशिष्ट जल बेतवा, पहुज और अंगौरी नदियों में नहीं छोड़ा जाएगा।

भूमि अधिग्रहण में उल्लेखनीय प्रगति

बीडा द्वारा अब तक लगभग 25,706 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों को भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के प्रावधानों के अनुसार पारदर्शी तरीके से मुआवजा दिया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलेगा आधुनिक विकास का लाभ

परियोजना के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक शहरी सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। स्थानीय निवासियों के लिए पार्क, स्वास्थ्य केंद्र, शैक्षणिक संस्थान, कौशल विकास केंद्र और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे ग्रामीण और शहरी विकास के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।

बीडा सीईओ ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

बीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी संजय कुमार खत्री ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय से प्राप्त स्वीकृति बुंदेलखंड के विकास इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की परिकल्पना के अनुरूप बीडा को देश की सबसे आधुनिक, सतत और पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना बुंदेलखंड को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर स्थापित करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में व्यापक सुधार लाएगी तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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  • Rashel Kachwah Rajput

    Rashel Kachwah Rajput

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