
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में शासन ने शिक्षा विभाग में महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का पुनर्विन्यास करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। शासन द्वारा जारी आदेशों के अनुसार माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के शीर्ष प्रशासनिक पदों पर बदलाव किया गया है, जिसे शिक्षा सुधारों को गति देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
जारी आदेश के तहत वर्तमान में प्रभारी शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ के पद पर कार्यरत प्रताप सिंह बघेल को अब प्रभारी शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश, प्रयागराज/लखनऊ का दायित्व सौंपा गया है। वहीं प्रभारी निदेशक, साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के पद पर कार्यरत अनिल भूषण चतुर्वेदी को प्रभारी शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है।
शासन के इस निर्णय को शिक्षा प्रशासन में बेहतर समन्वय, प्रभावी अनुश्रवण और योजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों अधिकारी शिक्षा प्रशासन का लंबा अनुभव रखते हैं और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी कार्यक्षमता का परिचय दे चुके हैं। ऐसे में उनके नेतृत्व में विभागीय कार्यों को और अधिक गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
प्रताप सिंह बघेल को माध्यमिक शिक्षा की जिम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी गई है जब प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं की गुणवत्ता, विद्यालयों में शैक्षिक सुधार, डिजिटल शिक्षा के विस्तार तथा नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि उनके अनुभव का लाभ माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में मिलेगा।
वहीं अनिल भूषण चतुर्वेदी को बेसिक शिक्षा विभाग की कमान सौंपे जाने को भी महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग वर्तमान में निपुण भारत मिशन, विद्यालयों में आधारभूत शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल संसाधनों के विस्तार और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर कार्य कर रहा है। ऐसे में चतुर्वेदी की नई भूमिका विभागीय योजनाओं के प्रभावी संचालन में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
योगी सरकार लगातार शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दे रही है। विद्यालयी शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने, शैक्षणिक परिणामों में सुधार लाने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग में किया गया यह प्रशासनिक पुनर्विन्यास भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
शासन का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपने से विभागीय कार्यप्रणाली में और अधिक दक्षता आएगी तथा शिक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ छात्रों तक समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। नई जिम्मेदारियों के साथ दोनों अधिकारियों से शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत तथा परिणामोन्मुख बनाने की अपेक्षा की जा रही है।
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