
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे विद्यार्थियों के सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखाई देने लगे हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के विद्यार्थियों ने इस वर्ष जीईई मेंस, जीईई एडवांस्ड और बोर्ड परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवासीय सुविधा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध कराने की सरकार की नीति अब हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को नई दिशा दे रही है। यही वजह है कि सर्वोदय विद्यालयों के छात्र अब देश की प्रतिष्ठित तकनीकी और उच्च शिक्षण संस्थाओं तक पहुंचने में सफल हो रहे हैं।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना सफलता की मजबूत नींव
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार मिर्जापुर के मडिहान स्थित सर्वोदय विद्यालय को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है। डॉ. अरुण कुमार तिवारी तथा टाटा एआईजी के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के सहयोग से यहां जीईई और नीट परीक्षाओं की तैयारी के लिए “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित किया गया है। इस पहल का असर इस वर्ष के परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। विद्यालय के कुल 11 विद्यार्थियों ने जीईई मेंस परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।
छात्राओं ने दिखाया शानदार प्रदर्शन
मढिहान सर्वोदय विद्यालय की छात्राओं ने विशेष उपलब्धि हासिल की है। दामिनी पटेल, अंवला वर्मा, सृष्टि, शिवानी और रागिनी ने जेईई मेंस परीक्षा उत्तीर्ण की है। वहीं छात्रा प्रीति ने न केवल जेईई मेंस बल्कि जेईई एडवांस्ड के लिए भी क्वालीफाई किया है। प्रीति और दामिनी को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी के बीबीए और एमबीए कार्यक्रम के लिए भी शॉर्टलिस्ट किया गया है, जो विद्यालय और प्रदेश दोनों के लिए गौरव का विषय माना जा रहा है।
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प्रदेश के विभिन्न जिलों के छात्रों ने भी हासिल की सफलता
जेईई मेंस परीक्षा में देवरिया के मेहरौना स्थित विद्यालय के विकास यादव और अंकित सिंह ने सफलता प्राप्त की। बाराबंकी के तीरगांव सर्वोदय विद्यालय के अभिषेक मिश्रा, बस्ती के जोगियाटप्पा भानपुर विद्यालय के अमित कुमार तथा मिर्जापुर के परसिया विद्यालय के ऋषिकेश भारती ने भी सफलता हासिल कर प्रदेश के सर्वोदय विद्यालयों की गुणवत्ता को प्रमाणित किया है।
बोर्ड परीक्षाओं में भी सर्वोदय विद्यालयों का दबदबा
प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ बोर्ड परीक्षाओं में भी सर्वोदय विद्यालय के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। गाजियाबाद के निडौरी स्थित सर्वोदय विद्यालय की छात्रा अंजलि पुंडीर ने जनपद स्तर पर चौथा स्थान और अंशिका ने छठा स्थान प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दोनों छात्राओं को सम्मानित किया गया। अंजलि पुंडीर को 31 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र और पदक प्रदान किया गया, जबकि अंशिका को 21 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र और पदक देकर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा तथा मुख्य विकास अधिकारी कुमार सौरभ उपस्थित रहे।
मंत्री असीम अरुण ने दी बधाई
समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने सभी सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक प्रतिभाशाली छात्र को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सर्वोदय विद्यालयों की यह उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिक्षा सुधार और सामाजिक समावेशन की नीति की सफलता का प्रमाण है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक स्थिति किसी भी छात्र की प्रतिभा के मार्ग में बाधा न बने।
103 आवासीय विद्यालय गढ़ रहे नए भारत के निर्माता
उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित 103 आवासीय सर्वोदय विद्यालय वर्तमान में हजारों विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इन विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ आवास, भोजन, पुस्तकें और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
सरकार की शिक्षा-केंद्रित नीतियों के चलते अब ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी आईआईटी, मेडिकल कॉलेजों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वर्षों तक जो अवसर केवल बड़े शहरों और महंगे कोचिंग संस्थानों तक सीमित थे, वे अब सर्वोदय विद्यालयों के माध्यम से गरीब और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों तक पहुंच रहे हैं।
शिक्षा सुधारों का दिख रहा असर
प्रदेश सरकार का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर ही सामाजिक बदलाव का सबसे मजबूत माध्यम हैं। सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों की यह सफलता न केवल शिक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों की झलक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलने पर ग्रामीण और कमजोर वर्गों के छात्र भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। सर्वोदय विद्यालयों की यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे व्यापक बदलावों की एक महत्वपूर्ण मिसाल बनकर सामने आई है।
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