
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE द्वारा शैक्षणिक सत्र के बीच में कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए ‘तीन-भाषा नीत को अनिवार्य रूप से लागू करने के फैसले पर देश में सियासी और प्रशासनिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर इस नीति के तत्काल क्रियान्वयन पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। दिग्विजय सिंह ने पत्र के जरिए इस फैसले को लेकर देश भर के लाखों अभिभावकों और छात्रों की गंभीर चिंताओं से पीएम को अवगत कराया और केंद्र सरकार से इसमें तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की।
सत्र के बीच में फैसला थोपने से मचेगी अफरातफरी
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में दिग्विजय सिंह ने कहा कि वे सीबीएसई कक्षा 9 के चिंतित अभिभावकों के एक बड़े समूह द्वारा सौंपी गई याचिका (अर्जी) को आगे बढ़ा रहे हैं, जिन्होंने सत्र के बीच में अचानक लिए गए इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने लिखा कि बिना पर्याप्त शिक्षकों, आवश्यक पाठ्यपुस्तकों या छात्रों को तैयारी का समय दिए बिना इस नीति को अचानक लागू करना शिक्षा व्यवस्था में गंभीर व्यवधान पैदा कर सकता है। दिग्विजय सिंह ने इसकी तुलना पूर्व के एक फैसले से करते हुए चेतावनी दी कि यह जल्दबाजी ठीक वैसी ही है जैसी सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लागू करते समय दिखाई गई थी, जिसके कारण देश भर के लाखों छात्रों को भारी मानसिक तनाव और अफरातफरी का सामना करना पड़ा था।
सीबीएसई ने पलटा अपनी ही गवर्निंग बॉडी का फैसला
कांग्रेस नेता ने सीबीएसई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए बोर्ड के पुराने फैसलों और हालिया निर्देशों के बीच की बड़ी विसंगति को उजागर किया। दिग्विजय सिंह के अनुसार:
- दिसंबर 2025 का फैसला: सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी ने पाठ्यक्रम समिति की उस सिफारिश को मंजूरी दी थी, जिसमें साफ कहा गया था कि जब तक एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा भाषाओं की ग्रेडेड (स्तरीय) पाठ्यपुस्तकें जारी नहीं कर दी जातीं, तब तक स्कूल अपनी पुरानी अध्ययन योजना ही जारी रखें।
- 15 मई 2026 का सर्कुलर: अपनी ही गवर्निंग बॉडी के फैसले के विपरीत जाते हुए सीबीएसई ने अचानक 15 मई को एक नया सर्कुलर जारी कर दिया, जिसमें आगामी 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9वीं में तीसरी भाषा की पढ़ाई को अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
दिग्विजय सिंह ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि एनसीईआरटी ने अभी तक इसके लिए जरूरी किताबें जारी नहीं की हैं और इसके विकल्प के रूप में सीबीएसई ने कक्षा 9वीं के छात्रों को कक्षा 6वीं की भाषा की किताबों से पढ़ने का अजीब सुझाव दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सीबीएसई ने अपनी ही गवर्निंग बॉडी के सर्वसम्मत फैसले को दरकिनार कर हजारों स्कूलों की शैक्षणिक योजना को दांव पर क्यों लगाया?
गैर-हिंदी भाषी और पूर्वोत्तर के राज्यों में खड़ी होगी बड़ी चुनौती
दिग्विजय सिंह ने पत्र में उन व्यावहारिक भौगोलिक और भाषाई चुनौतियों का भी प्रमुखता से जिक्र किया, जहां हिंदी मुख्य भाषा नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि दक्षिण भारतीय और पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) राज्यों के छात्रों को इस फैसले से सबसे ज्यादा कठिनाई होगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां स्थानीय आदिवासी भाषाएं वर्तमान में सीबीएसई की मान्यता प्राप्त भाषाओं की आधिकारिक सूची में शामिल ही नहीं हैं, वहां छात्र तीसरी भाषा का चयन कैसे और किस आधार पर करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को फिलहाल रोका जाए।
- digvijaya-singh-writes-to-pm-modi-over-cbse-three-language-policy-for-class-9-students







