
नई दिल्ली: लोकसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद विपक्षी एकजुटता को आगे बढ़ाने और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करने के लिए सोमवार 8 जून को राजधानी दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की पहली औपचारिक महाबैठक आयोजित की गई। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में गठबंधन के 23 राजनीतिक दलों के कुल 27 शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया
बैठक में जुटे कांग्रेस, सपा और टीएमसी सहित कई दिग्गज
जिसमें कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कमान संभाली। बैठक में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बनर्जी विशेष रूप से शामिल हुए, जबकि बिहार से राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव और जम्मू-कश्मीर से उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
उद्धव ठाकरे वर्चुअली जुड़े, सुप्रिया सुले भी बैठक में शामिल
महाराष्ट्र की सियासत से जुड़े शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे शारीरिक रूप से दिल्ली नहीं पहुंच सके लेकिन उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में सक्रिय भागीदारी की, वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की ओर से सांसद सुप्रिया सुले और निर्दलीय राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल भी इस विपक्षी कुनबे के साथ खड़े नजर आए।
वामपंथी और क्षेत्रीय दलों ने दिखाई ताकत
गठबंधन को मजबूती देने के लिए वामपंथी और छोटे क्षेत्रीय दलों के नेताओं ने भी पूरी मौजूदगी दर्ज कराई, जिसमें सीपीआई (एम) से जॉन ब्रिटास, सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव डी. राजा, सीपीआई (एमएल) से दीपांकर भट्टाचार्य, आईयूएमएल के सादिक थांगल, आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन, वीसीके के थिरुमावलवन, एमडीएमके के वाइको, केरल कांग्रेस के के. जॉर्ज और केरल कांग्रेस (एम) से जोस के. मनी शामिल हुए। इसके साथ ही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल, लोक दल के सुनील सिंह, फॉरवर्ड ब्लॉक के जी. देवराजन, शेतकारी कामगार पक्ष के जयंत पाटिल और भारत आदिवासी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी इस महामंथन में हिस्सा लिया।
‘आप’ और ‘डीएमके’ की अनुपस्थिति से उठे सवाल
हालांकि, एक तरफ जहां 23 दलों की मौजूदगी को विपक्षी एकजुटता की सफलता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रमुख खाली कुर्सीयों ने गठबंधन के भीतर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। दक्षिण भारत के सबसे मजबूत गढ़ तमिलनाडु से सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और दिल्ली व पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (आप) ने इस महत्वपूर्ण बैठक से पूरी तरह दूरी बना ली, जिससे विपक्षी एकजुटता और आगामी सियासी फैसलों के भविष्य पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
- india-bloc-meeting-delhi-opposition-leaders-list-aap-dmk-absent-future-strategy











