
उमरिया/राकेश दर्दवंशी। विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ नेशनल पार्क के आसपास संचालित कई रिसोर्ट और होटलों में फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक पड़ताल में सामने आया है कि अधिकांश रिसोर्टों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन अधूरा है। कई जगहों पर फायर एनओसी, स्मोक डिटेक्टर और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार जंगल क्षेत्र में स्थित कई रिसोर्टों में बिजली की वायरिंग, ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल सिस्टम और रसोईघरों में एलपीजी सिलेंडरों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ संस्थानों में फायर सेफ्टी प्रशिक्षण और नियमित फायर ड्रिल की व्यवस्था भी नहीं है। जब कुछ रिसोर्ट संचालकों से फायर एनओसी और सुरक्षा दस्तावेजों के बारे में जानकारी मांगी गई तो कई स्थानों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि वन क्षेत्र के आसपास स्थित पर्यटन स्थलों में आग की एक छोटी घटना भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में फायर सेफ्टी मानकों का कड़ाई से पालन बेहद जरूरी है। मामले को लेकर पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन से सभी रिसोर्टों का व्यापक फायर ऑडिट कराने तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
गौरतलब है कि हाल ही में कलेक्टर द्वारा होटल और रिसोर्ट संचालकों को फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सात दिन के भीतर सुरक्षा उपायों की जानकारी उपलब्ध कराने को भी कहा गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस दिशा में आगे क्या कार्रवाई करता है।
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