
भोपाल। राज्य प्रशासनिक सेवा की एक वरिष्ठ अधिकारी की प्रतिनियुक्ति महज दस महीने के भीतर ही समाप्त कर दी गई है। करीब दस माह पहले उन्हें एक बड़े विभाग में एडिशनल डायरेक्टर के पद पर पदस्थ किया गया था, लेकिन अब सरकार ने उन्हें वापस मंत्रालय में पदस्थ कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार उनकी नियुक्ति के समय से ही विभाग के भीतर इस पदस्थापना को लेकर असहमति का माहौल था। बताया जाता है कि जिस पद पर अधिकारी को भेजा गया था, उस पर परंपरागत रूप से विभागीय अधिकारियों की पदोन्नति के माध्यम से नियुक्ति की जाती रही है। ऐसे में बाहरी प्रतिनियुक्ति को लेकर विभाग के कई अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी।
जानकारी के मुताबिक इस मामले को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल भी उठे। यहां तक कि विभागीय मंत्री द्वारा भी संबंधित प्रक्रिया और नियमों को लेकर जानकारी मांगे जाने की चर्चा प्रशासनिक हलकों में रही। इसके बाद से विभाग के भीतर प्रतिनियुक्ति को लेकर असंतोष का माहौल और गहरा गया।
सूत्रों का दावा है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान अधिकारी को विभागीय समन्वय स्थापित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की भी चर्चाएं रहीं, जिससे कार्यप्रणाली प्रभावित होती रही।
आखिरकार सरकार ने इस पूरे विवाद का पटाक्षेप करते हुए अधिकारी को वहां से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव के पद पर पदस्थ कर दिया है। इस फैसले के बाद विभाग में लंबे समय से चल रहे असंतोष और अनिश्चितता के समाप्त होने की बात कही जा रही है।
प्रशासनिक गलियारों में इस घटनाक्रम को विभागीय संवेदनशीलता, पदस्थापना प्रक्रिया और आंतरिक समन्वय से जुड़े एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।








