
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। पाकिस्तान के कई शीर्ष नेताओं और सैन्य अधिकारियों ने हाल के महीनों में जल सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कड़े बयान दिए हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख ने संकेत दिए हैं कि सिंधु नदी प्रणाली से जुड़े जल प्रवाह में कमी को देश के लिए गंभीर मुद्दा माना जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान को आशंका है कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने और अपने जल संसाधन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से उसकी कृषि और जल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। पाकिस्तान की लगभग 80% कृषि सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर मानी जाती है, इसलिए इस मुद्दे को लेकर वहां चिंता बढ़ी हुई है।
इसी बीच सीमा पर ड्रोन गतिविधियों को लेकर भी सतर्कता बढ़ी है। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पास कई एंटी-ड्रोन और निगरानी इकाइयां तैनात की हैं। कुछ रिपोर्टों में 35 विशेष एंटी-ड्रोन यूनिट्स की तैनाती का उल्लेख किया गया है, हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भारतीय सेना भी LoC पर ड्रोन गतिविधियों को लेकर लगातार निगरानी बनाए हुए है। सेना प्रमुख पहले ही पाकिस्तान से सीमा पार ड्रोन गतिविधियों को रोकने की बात कह चुके हैं और ऐसे प्रयासों को अस्वीकार्य बताया था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सीमा क्षेत्रों में निगरानी और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही हैं।
फिलहाल दोनों देशों के बीच जल, सुरक्षा और सीमा संबंधी मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। हालांकि किसी संभावित सैन्य कार्रवाई या युद्ध संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर उठाए जाने वाले कदम ही क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे महत्वपूर्ण होंगे।
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