
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश की पवित्र नदी का सही और ऐतिहासिक नाम ‘शिप्रा’ है, इसलिए सभी सरकारी दस्तावेजों, योजनाओं, पत्राचार और सार्वजनिक संवाद में इसी नाम का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े नामों की शुद्धता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों को दिए स्पष्ट निर्देश
मुख्यमंत्री ने एक समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों से कहा कि कई जगहों पर नदी का नाम ‘क्षिप्रा’ लिखा और बोला जाता है, जबकि इसका वास्तविक नाम ‘शिप्रा’ है। उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में सभी विभाग सरकारी रिकॉर्ड, सूचना पट्ट, योजनाओं और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में ‘शिप्रा’ नाम का ही इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि इस संबंध में किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति नहीं रहनी चाहिए।
शिप्रा नदी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिप्रा नदी का उज्जैन की धार्मिक परंपरा और भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान है। सिंहस्थ महाकुंभ सहित कई प्रमुख धार्मिक आयोजन इसी नदी के तट पर होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक पहचान से जुड़े नामों का सही स्वरूप सुरक्षित रखना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सरकार ने सभी संबंधित विभागों को भविष्य में केवल ‘शिप्रा’ नाम का ही उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
- mp-news-cm-mohan-yadav-shipra-river-real-name-instructions








