
निवाड़ी/गढ़कुंढार (रानू परिहार की रिपोर्ट) : बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती पर विरासत संरक्षण और समाजसेवा के क्षेत्र में खंगार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश खंगार नन्ना की भूमिका चर्चा में है। समाजसेवा के साथ-साथ गढ़कुंढार किले के संरक्षण, क्षेत्र में सुविधाओं के विकास और ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों को लेकर उनका नाम सामने आता रहा है।
गढ़कुंढार किला खंगार राजवंश के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण धरोहर है। लंबे समय तक रखरखाव की कमी और अन्य कारणों से किले के कई हिस्से उपेक्षित रहे। रमेश खंगार नन्ना के प्रयासों से किले के संरक्षण और परिसर के विकास की दिशा में विभिन्न कार्य किए जाने का दावा किया जाता है। किले की साफ-सफाई, परिसर के सौंदर्यीकरण और क्षतिग्रस्त हिस्सों के संरक्षण जैसे कार्यों पर भी ध्यान दिया गया है। रमेश खंगार नन्ना का मानना है कि ऐतिहासिक किले केवल पत्थरों और इमारतों का समूह नहीं होते, बल्कि वे समाज के इतिहास, शौर्य और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक होते हैं। इसी सोच के साथ गढ़कुंढार की ऐतिहासिक पहचान को संरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।
किले तक पहुंच के रास्तों को बेहतर बनाने पर जोर
गढ़कुंढार किले तक पहुंचने वाले दुर्गम रास्तों के कारण पर्यटकों और स्थानीय लोगों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार किले तक जाने वाले रास्तों को सुगम बनाने के लिए समतलीकरण, मुरमीकरण और अन्य आवश्यक कार्य कराए गए हैं। इससे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बाहर से आने वाले पर्यटकों को आवागमन में सुविधा मिलने की बात कही जा रही है।
जरूरतमंदों की मदद के लिए भी सक्रिय
रमेश खंगार नन्ना की पहचान समाजसेवी के रूप में भी बताई जाती है। गरीब और जरूरतमंद परिवारों की सहायता, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के इलाज में सहयोग, विद्यार्थियों की शिक्षा में मदद और जरूरतमंद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने जैसे कार्यों का उल्लेख किया जाता है। सर्दी के मौसम में जरूरतमंदों को कंबल और गरीब परिवारों को खाद्यान्न सहायता उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों में भी उनके सहयोग की बात सामने आती रही है। उनका कहना है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना समाजसेवा का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।
गढ़कुंढार को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास
रमेश खंगार नन्ना गढ़कुंढार किले को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में प्रयासरत होने की बात कहते हैं। इसके लिए शासन-प्रशासन, पुरातत्व विभाग और संबंधित संस्थाओं के स्तर पर पत्राचार एवं संवाद किए जाने का दावा किया गया है। उनका मानना है कि यदि गढ़कुंढार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है तो बुंदेलखंड में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है।
गढ़कुंढार महोत्सव बना सांस्कृतिक मंच
हर वर्ष 27, 28 और 29 दिसंबर को आयोजित होने वाला गढ़कुंढार महोत्सव क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को सामने लाने वाला प्रमुख आयोजन बताया जाता है। आयोजन के माध्यम से खंगार समाज के इतिहास के साथ बुंदेली लोककला और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मंच उपलब्ध कराया जाता है। महोत्सव के दौरान मंच व्यवस्था, अतिथियों का स्वागत, भोजन, सुरक्षा, बिजली-पानी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी आयोजक टीम द्वारा संभाली जाती है। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी के कारण यह आयोजन क्षेत्र में सामाजिक एकजुटता का माध्यम भी बनता है।
समाज में एकता और शिक्षा का संदेश
रमेश खंगार नन्ना समाज में एकता को मजबूत करने और आपसी विवादों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने पर भी जोर देते हैं। उनका संदेश है कि संगठित समाज ही अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत तरीके से आगे बढ़ा सकता है। शिक्षा को समाज की प्रगति का आधार बताते हुए वे युवाओं को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और बेटियों को भी बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की अपील की जाती है।
गढ़कुंढार की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण से लेकर समाजसेवा, शिक्षा और सामाजिक एकता तक रमेश खंगार नन्ना की सक्रियता को उनके समर्थक समाज के लिए सकारात्मक पहल के रूप में देखते हैं। आने वाले समय में गढ़कुंढार को पर्यटन और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में किस स्तर तक पहचान मिलती है, यह इन प्रयासों और शासन-प्रशासन की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
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