
उत्तर प्रदेश में मदरसों की फंडिंग की जांच से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने मदरसों की जांच पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि इस स्तर पर जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। इसके साथ ही एंटी टेररिस्ट स्क्वाड को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति मिल गई है।
ATS की जांच पर रोक लगाने की मांग
यह याचिका मदरसा टीचर्स एसोसिएशन की ओर से दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बड़ी संख्या में मदरसों की जांच की जा रही है और यह कार्रवाई उनके अधिकारों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने अदालत से ATS की जांच पर रोक लगाने की मांग की थी।
विदेशी फंडिंग और वित्तीय लेनदेन को लेकर संदेह
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जांच का उद्देश्य केवल उन मामलों की पड़ताल करना है, जिनमें विदेशी फंडिंग और वित्तीय लेनदेन को लेकर संदेह सामने आया है। सरकार का तर्क था कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और बिना पर्याप्त आधार के इसमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी व्यक्ति या संस्था को किसी कार्रवाई से आपत्ति होगी, तो वह कानून के अनुसार उचित मंच पर अपनी बात रख सकता है।
मदरसों की फंडिंग और वित्तीय गतिविधियों को लेकर ATS की जांच पहले की तरह जारी
इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में मदरसों की फंडिंग और वित्तीय गतिविधियों को लेकर ATS की जांच पहले की तरह जारी रहेगी। जांच एजेंसी कथित विदेशी फंडिंग, बैंकिंग लेनदेन और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल हाईकोर्ट के इस आदेश से जांच पर रोक लगाने की मांग को बड़ा झटका माना जा रहा है।
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