
डबरा: ग्वालियर जिले के डबरा देहात थाना पुलिस एक बार फिर विवादों में घिर गई है। गंगाबाग क्षेत्र में हुई मोटर केबल चोरी के मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए तीन युवकों के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने युवकों को करीब 24 घंटे तक थाने में बंद रखा और पूछताछ के दौरान उनके साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करते हुए मारपीट की। उनका आरोप है कि पुलिस की कथित पिटाई के कारण एक युवक की हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्वालियर रेफर करना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच की बात कही है।
परिजनों के अनुसार, गंगाबाग में हुई मोटर केबल चोरी की जांच के सिलसिले में पुलिस ने सिमरिया निवासी तीन युवकों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। उनका आरोप है कि तीनों युवकों को बिना किसी औपचारिक कार्रवाई के करीब 24 घंटे तक थाने में रखा गया। इस दौरान उनसे पूछताछ के नाम पर मारपीट की गई। परिजनों का कहना है कि कथित मारपीट के कारण आसाराम परिहार पुत्र जगदीश परिहार की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए ग्वालियर के लिए रेफर कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही सिमरिया गांव से बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं डबरा देहात थाना पहुंच गए। ग्रामीणों ने थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए पुलिस के खिलाफ नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि हिरासत में लिए गए युवकों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं था, इसके बावजूद उन्हें लंबे समय तक थाने में रखा गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप सही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
मामले की सूचना मिलने पर सौरव कुमार मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद पुलिस ने हिरासत में लिए गए दो अन्य युवकों को छोड़ दिया। एसडीओपी सौरव कुमार ने कहा कि मामले में लगाए गए सभी आरोपों की जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। एक ओर परिजन और ग्रामीण पुलिस पर हिरासत में मारपीट और थर्ड डिग्री देने के गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
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