
मध्य प्रदेश के सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों वन विभाग से जुड़ी चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। कुछ समय पहले ऐसा माना जा रहा था कि विभाग में तबादलों का दौर थम चुका है, लेकिन अब फिर से तबादलों और प्रशासनिक फेरबदल की संभावनाओं ने नई बहस छेड़ दी है। इन्हीं चर्चाओं के बीच ‘मंकू’ नामक अधिकारी का नाम भी लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। सत्ता के गलियारों में यह दावा किया जा रहा है कि विभाग के भीतर उनकी सक्रियता और प्रभाव पहले की तरह बरकरार है।
सूत्रों के अनुसार, लंबे समय तक वन विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके मंकू ने पूरे विभाग में मजबूत प्रशासनिक पकड़ बनाई थी। चर्चा है कि मल्टीलेयर स्तर पर होने वाले तबादलों में भी उनकी भूमिका को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विभागीय हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि कुछ अधिकारी भले ही अपने पुराने पदों पर नहीं हैं, लेकिन उनके संपर्क और प्रभाव के कारण वे अब भी विभागीय गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि वन विभाग में यदि एक बार फिर बड़े पैमाने पर तबादले होते हैं, तो इसका असर विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक संतुलन पर पड़ सकता है। चर्चाओं के अनुसार, केवल तबादलों की सूची ही नहीं, बल्कि विभाग से जुड़े कुछ अन्य लंबित मामलों में भी जल्द फैसले देखने को मिल सकते हैं। यही वजह है कि सत्ता के गलियारों में वन विभाग को लेकर लगातार अटकलों का दौर जारी है।
फिलहाल यह पूरा मामला चर्चाओं और दावों के स्तर पर है। सरकार या वन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि आने वाले दिनों में तबादलों की नई सूची जारी होती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौजूदा चर्चाओं में कितनी सच्चाई है और विभाग में किस तरह के प्रशासनिक बदलाव होने वाले हैं।
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