
बुरहानपुर/ राजू सिंह राठौड़: “स्कूल चलें हम” अभियान के बावजूद बुरहानपुर जिले के नेपानगर क्षेत्र के आदिवासी ग्राम बाकड़ी में बेटियों की शिक्षा आज भी अधूरी है। गांव में हाईस्कूल नहीं होने और नजदीकी स्कूल करीब 12 किलोमीटर दूर होने के कारण अधिकांश छात्राएं आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं।
कम उम्र में ही शादी
ग्रामीणों के अनुसार हाईस्कूल तक पहुंचने के लिए छात्राओं को जंगल के रास्ते लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते अभिभावक बेटियों को आगे पढ़ने के लिए बाहर नहीं भेजते। इसका परिणाम यह है कि पिछले कई वर्षों से गांव की बड़ी संख्या में छात्राएं माध्यमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ रही हैं और कई की कम उम्र में ही शादी हो जाती है।
आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं
इस वर्ष भी गांव के स्कूल से आठवीं पास करने वाले 34 विद्यार्थियों में केवल 8 लड़कों ने नौवीं कक्षा में प्रवेश लिया, जबकि एक भी छात्रा आगे की पढ़ाई के लिए स्कूल नहीं पहुंच सकी।
गांव में हाईस्कूल खोलने की मांग
ग्रामीण अखंड सिंह, शंकर मेहता और जगन्नाथ सिंह का कहना है कि वे वर्षों से गांव में हाईस्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि गांव में हाईस्कूल खुल जाए तो बेटियां भी अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगी।
हाईस्कूल खोलने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे
भातखेड़ा के जन शिक्षक राजेश कापड़े ने बताया कि हाईस्कूल खोलने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। स्कूल के लिए जमीन भी चिन्हित की गई और सर्वे भी कराया गया, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी।
प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा गया
वहीं आदिम जाति विभाग के जिला संयोजक भरत राजपुरे ने बताया कि हाईस्कूल स्थापना का प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आगे की पढ़ाई का अवसर
गांव के लोगों का कहना है कि शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द बाकड़ी में हाईस्कूल की स्थापना की जाए, ताकि बेटियों को अपने ही गांव के पास आगे की पढ़ाई का अवसर मिल सके।
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