
नई दिल्ली/मस्कट: महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप घोटाले के मुख्य आरोपी और ₹5,000 करोड़ की सट्टेबाजी के मास्टरमाइंड सौरभ चंद्राकर को ओमान में गिरफ्तार कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, चंद्राकर फर्जी इंडोनेशियाई पासपोर्ट का इस्तेमाल कर अवैध तरीके से ओमान में दाखिल हुआ था, जहाँ रॉयल ओमान पुलिस ने भारतीय जांच एजेंसियों के अनुरोध पर जारी इंटरपोल के ‘रेड कॉर्नर नोटिस’ के आधार पर उसे धर दबोचा। फिलहाल उसे मस्कट के अलखौद डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। भारत सरकार ने उसकी गिरफ्तारी के बाद उसे वापस भारत लाने (प्रत्यर्पण) की कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी है, वहीं सौरभ चंद्राकर ने भी ओमान में अपना केस लड़ने के लिए वकीलों की एक भारी-भरकम टीम तैनात की है।
छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला सौरभ चंद्राकर शुरुआत में वहाँ ‘जूस फैक्ट्री’ नाम से एक छोटी सी दुकान चलाता था। उसने साल 2017 में स्थानीय स्तर पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार शुरू किया, जिसके बाद साल 2019 में वह दुबई भाग गया। दुबई पहुंचकर उसने इस अवैध धंधे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलाया। चंद्राकर पर साल 2021 के आईपीएल मैच के दौरान ₹2,000 करोड़ से ज्यादा का सट्टा खिलवाने का भी गंभीर आरोप है। इसी अवैध कमाई से उसने देश-विदेश में करोड़ों की बेनामी संपत्ति बनाई। प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे घोटाले में अब तक लगभग ₹4,336 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है। चंद्राकर साल 2019 से ही लगातार फरार चल रहा था और भारतीय एजेंसियां उसकी तलाश में थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, चंद्राकर ने सीसीएफ में चल रही सुनवाई के दौरान ही यूएई छोड़ दिया था। अधिकारियों का मानना है कि ओमान में फर्जी पासपोर्ट के सहारे एंट्री करना उसकी एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है ताकि वह भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को लटका सके।
दरअसल, ओमान के कड़े कानूनों के तहत फर्जी पासपोर्ट के जरिए देश में अवैध रूप से प्रवेश करना एक बेहद गंभीर अपराध माना जाता है, जिसमें दोषी को 3 से 5 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। ऐसे में ओमान पुलिस पहले अपने स्तर पर इस फर्जीवाड़े की जांच कर रही है, जिससे उसे भारत लाने की राह में कुछ कानूनी अड़चनें आ सकती हैं। हालांकि, भारतीय एजेंसियां ओमान सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि उसे जल्द से जल्द कानून के शिकंजे में लाया जा सके।
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