NCERT की 8वीं की इतिहास की किताब में बड़ा बदलाव, हिटलर-नाजीवाद का जिक्र हटाया, सावरकर को मिली जगह

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद NCERT ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी की है। नई किताब में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसमें एडोल्फ हिटलर और नाजी विचारधारा से जुड़े संदर्भ हटा दिए गए हैं, जबकि वीर सावरकर के स्वराज संबंधी विचारों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही भारत विभाजन को लेकर कांग्रेस के रुख की प्रस्तुति में भी बदलाव किया गया है। यह संशोधन पहले न्यायपालिका से जुड़े अध्याय पर विवाद और उसके बाद हुए बदलावों के बाद सामने आया है।

क्या-क्या बदला गया?

नई किताब के इतिहास अध्याय “India’s Long Road to Independence” में भारत विभाजन से जुड़ी भाषा में बदलाव किया गया है। अब इसमें कहा गया है कि विभाजन का व्यापक स्तर पर कांग्रेस ने भी विरोध किया था, लेकिन उस समय विभाजन स्वीकार करना ही एकमात्र रास्ता था या नहीं, यह आज भी बहस का विषय है। पहले की किताब में यह लिखा गया था कि सांप्रदायिक हिंसा के चलते कांग्रेस नेतृत्व मजबूर होकर विभाजन स्वीकार करने पर राजी हुआ था। संशोधित संस्करण में यह पंक्ति हटा दी गई है।

वीर सावरकर का उल्लेख जोड़ा गया

नई किताब में पूर्ण स्वराज की मांग के संदर्भ में एक नया उल्लेख जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि 1925 में वीर विनायक दामोदर सावरकर ने भी स्वराज की मांग रखी थी। यह संदर्भ पहले की पुस्तक में शामिल नहीं था।

हिटलर और नाजीवाद से जुड़े संदर्भ हटे

संशोधित पुस्तक से एडोल्फ हिटलर, नाजी विचारधारा और उससे जुड़े विवरण को हटा दिया गया है। पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े अध्याय में इनका संदर्भ आता था, जिसे अब हटाकर स्वतंत्रता आंदोलन पर अधिक केंद्रित सामग्री दी गई है।

न्यायपालिका वाला अध्याय भी बदला

कुछ महीने पहले न्यायपालिका पर आधारित अध्याय को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के चलते NCERT ने पुरानी पुस्तक वापस ले ली थी। अब संशोधित संस्करण में विवादित अंश हटाकर जनहित याचिका PIL, ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान जैसे नए विषय शामिल किए गए हैं।

भेदभाव की परिभाषा में भी बदलाव

नई किताब में आर्थिक पृष्ठभूमि को भी भेदभाव के आधारों में शामिल किया गया है। पहले इसमें जाति, धर्म, लिंग, नस्ल और दिव्यांगता जैसे आधार प्रमुख थे। अब आर्थिक स्थिति को भी एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में जोड़ा गया है।

बदलावों पर छिड़ी नई बहस

पुस्तक में किए गए इन बदलावों के बाद शिक्षा और इतिहास को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। समर्थकों का कहना है कि इससे ऐतिहासिक तथ्यों को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है, जबकि आलोचकों का मानना है कि इतिहास की व्याख्या में बदलाव को लेकर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। फिलहाल NCERT की ओर से संशोधित पुस्तक छात्रों के लिए जारी कर दी गई है।

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  • Manisha Gupta

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