15 साल के टीएमसी शासन का हिसाब मांगेगी बंगाल सरकार, भ्रष्टाचार पर तैयार होगा व्हाइट पेपर

पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के 15 वर्षों के कार्यकाल की वित्तीय और प्रशासनिक समीक्षा शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने सभी विभागों से पिछले 15 साल के खर्च, राजस्व, परियोजनाओं, वित्तीय फैसलों और प्रशासनिक रिकॉर्ड मांगे हैं। सरकार का कहना है कि इन दस्तावेजों के आधार पर एक विस्तृत व्हाइट पेपर (White Paper) तैयार किया जाएगा, जिसमें कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और अधूरे विकास कार्यों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक किया जाएगा।

सभी विभागों को रिकॉर्ड सौंपने के निर्देश

सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि वे 2011 से 2026 तक के कार्यकाल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज, खर्च का ब्यौरा, सरकारी योजनाओं की प्रगति, टेंडर, राजस्व और अन्य प्रशासनिक फैसलों की जानकारी निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराएं। इन रिकॉर्ड की जांच के लिए मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है, जिसकी समीक्षा बैठक 29 जुलाई को प्रस्तावित है।

भ्रष्टाचार के आरोपों की होगी जांच

सरकार का दावा है कि टीएमसी शासन के दौरान कई विभागों में वित्तीय गड़बड़ियां, भर्ती घोटाले, अधूरी परियोजनाएं और प्रशासनिक अनियमितताएं हुईं। इन्हीं आरोपों की तथ्यात्मक समीक्षा कर विभागवार व्हाइट पेपर जारी किया जाएगा, ताकि जनता के सामने पूरा लेखा-जोखा रखा जा सके।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का रुख

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पहले भी कह चुके हैं कि उनकी सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम करेगी। उनका कहना है कि पिछली सरकार के दौरान हुई कथित वित्तीय गड़बड़ियों की व्यवस्थित जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाएगी और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

टीएमसी पर राजनीतिक दबाव बढ़ने के आसार

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विभागवार व्हाइट पेपर जारी होने से राज्य की राजनीति में बड़ा असर देखने को मिल सकता है। इससे पूर्ववर्ती सरकार के कामकाज को लेकर नई बहस छिड़ सकती है और विपक्षी दल टीएमसी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश करेंगे। हालांकि टीएमसी की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

जांच रिपोर्ट के बाद अगला कदम

सरकार का कहना है कि सभी विभागों से रिपोर्ट मिलने और उनकी जांच पूरी होने के बाद व्हाइट पेपर सार्वजनिक किया जाएगा। यदि जांच में किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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