CM डॉ. मोहन यादव करेंगे देश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद जल-सुरंग का निरीक्षण, विंध्य के 1450 गांवों को मिलेगा नर्मदा का पानी

भोपाल/कटनी/मैहर (देवेश शर्मा की रिपोर्ट): मध्यप्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद जल-सुरंग अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को कटनी जिले में निर्माणाधीन देश की सबसे लंबी जल-सुरंग का निरीक्षण करेंगे। लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी यह सुरंग नर्मदा के जल को विंध्य पर्वतमाला के भीतर से गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी फ्लो) के माध्यम से सोन नदी के कछार तक पहुंचाएगी। इसके पूरा होने से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।

करीब 17 वर्षों से निर्माणाधीन यह परियोजना देश की सबसे जटिल जल-सुरंग परियोजनाओं में गिनी जाती है। विंध्य क्षेत्र की कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों, चट्टानी संरचना, भारी जल रिसाव और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद अब यह परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। परियोजना में अब केवल अंतिम ब्रेक-थ्रू का कार्य शेष है।

स्लीमनाबाद टनल को मध्यप्रदेश के सिंचाई इतिहास की ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। लगभग 10.14 मीटर व्यास वाली इस सुरंग से नर्मदा का पानी बिना किसी पंप या बिजली की सहायता के केवल प्राकृतिक ढाल के सहारे आगे बढ़ेगा। इससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

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परियोजना का निर्माण वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। शुरुआती लागत लगभग 799 करोड़ रुपये थी, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों के कारण अब तक इस पर 1,610.47 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। निर्माण के दौरान अत्याधुनिक जर्मन टनल बोरिंग मशीन, विशेष ग्राउटिंग तकनीक और उच्च क्षमता वाले डी-वॉटरिंग सिस्टम का उपयोग किया गया।

सरकार के अनुसार परियोजना का 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। मुख्य सुरंग और ओपन कट नहर का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष कार्य तेजी से जारी है। राज्य सरकार ने चरणबद्ध तरीके से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का रोडमैप भी तैयार किया है। मार्च 2026 तक हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई शुरू हो चुकी है, जबकि दिसंबर 2026 और दिसंबर 2027 तक शेष क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह दौरा केवल निर्माण कार्य की समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि, जल प्रबंधन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद लाखों किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी जल उपलब्ध होगा, जिससे कृषि उत्पादन बढ़ने और क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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